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OTT के सैलाब में डूब रहे हैं सिनेमा हॉल? आंकड़े बता रहे हैं बॉक्स ऑफिस की असल कहानी

OTT ने दर्शकों की आदतें जरूर बदली हैं, लेकिन बॉक्स ऑफिस की कहानी खत्म नहीं हुई। पूरी बात समझने के लिए पढ़िए ये स्टोरी।
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 20, 2026

ott and box office

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

भारत में ओटीटी (OTT) ऐप्स के बढ़ते प्रभाव ने बॉक्स ऑफिस की दुनिया में एक नया परिदृश्य खड़ा कर दिया है। दर्शकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं, रिलीज की रणनीतियां फिर से आकार ले रही हैं, और थिएटरों की भूमिका पर नए सवाल उठ रहे हैं। हम देखेंगे कि यह बदलाव क्या है, क्यों हो रहा है, और इसका असर बॉक्स ऑफिस पर किस प्रकार पड़ रहा है।

रिलीज विंडो का सिकुड़ना और थिएटर पर दबाव

पहले फिल्मों का थिएटर में प्रदर्शन लगभग 90 दिनों तक चलता था, लेकिन अब यह अवधि घटकर 4 से 8 सप्ताह रह गई है। इससे दर्शक सोचने लगे हैं - थिएटर में जाने से बेहतर है कि घर पर ही फिल्म देखें, विशेषकर जब रिलीज जल्दी ही ओटीटी पर उपलब्ध हो जाती है।

Ernst & Young (EY) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में प्रति मिलियन लोगों पर केवल सात स्क्रीन हैं, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है। स्क्रीन की कमी और ओटीटी रिलीज की तेजी ने थिएटरों की पहुंच और आकर्षण दोनों को प्रभावित किया है।

ओटीटी ने बॉक्स ऑफिस पर क्या असर डाला?

2019 से 2024 के बीच, 100 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाली फिल्मों की संख्या 17 से घटकर 10 रह गई - यह 41 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।

हालांकि, 2025 में फिल्म इंडस्ट्री ने रिकॉर्ड तोड़ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया। 1,900 से अधिक फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें से 37 ने 1 अरब रुपये से अधिक की कमाई की, और थिएटर से होने वाली आमदनी में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह दर्शाता है कि थिएटर अभी भी जीवित हैं, विशेषकर जब रिलीज रणनीति सही हो।

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की प्रतिस्पर्धा और सौदेबाजी

ओटीटी मार्केट में अब Netflix, JioHotstar, Prime Video और ZEE5 जैसे प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं। Netflix का शेयर 36 प्रतिशत है, जबकि JioHotstar 21, Prime Video 18 और ZEE5 13 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।

लेकिन यह लाभ मुख्य रूप से बड़े बजट और स्टार-कास्ट वाली फिल्मों को मिल रहा है। मिड-बजट फिल्मों के लिए ओटीटी सौदे अभी भी चुनौती बने हुए हैं।

ओटीटी रिलीज की संख्या में बदलाव

EY की एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि ओटीटी पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों की संख्या 2024 में 60 थी, जो 2025 में घटकर 30 रह गई। इसका अर्थ है कि अब निर्माता थिएटर रिलीज को प्राथमिकता दे रहे हैं और ओटीटी पर बाद में रिलीज करने की रणनीति अपना रहे हैं।

ओटीटी की बढ़ती पहुंच और सब्सक्रिप्शन राजस्व

FICCI‑EY रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वीडियो सब्सक्रिप्शन राजस्व 11 प्रतिशत बढ़कर 9,200 करोड़ रुपये हो गया। ओटीटी यूजर्स की संख्या 9.5 से 11.8 करोड़ के बीच आंकी गई है।

इसके अलावा, 2025 में भारत में ओटीटी और डिजिटल दर्शकों की संख्या लगभग 975 मिलियन (66 प्रतिशत आबादी) थी, जिनमें से 216 मिलियन लोग पेड सब्सक्रिप्शन पर थे। यह दर्शाता है कि ओटीटी की पहुंच व्यापक हो रही है और यह दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।

बॉक्स ऑफिस और ओटीटी के बीच संतुलन

Reuters की रिपोर्ट बताती है कि अब इंडस्ट्री फिर से थिएटर-फर्स्ट मॉडल की ओर लौट रही है। फिल्में अब आमतौर पर थिएटर में रिलीज के लगभग आठ सप्ताह बाद ओटीटी पर आती हैं, जबकि महामारी के बाद कुछ फिल्मों के लिए यह अवधि केवल 2–4 सप्ताह थी। यह बदलाव दर्शाता है कि निर्माता और स्टूडियो बॉक्स ऑफिस को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अब बड़े सौदों पर खर्च कम कर रहे हैं।

क्या यह बदलाव दर्शकों के लिए अच्छा है?

थिएटर में रिलीज का समय बढ़ने से फिल्मों को बेहतर वर्ड-ऑफ-माउथ मिलता है, जिससे ओटीटी पर भी व्यूअरशिप बढ़ती है।
दूसरी ओर, ओटीटी की पहुंच और सब्सक्रिप्शन राजस्व बढ़ने से निर्माता और प्लेटफॉर्म दोनों को लाभ होता है। लेकिन मिड-बजट फिल्मों के लिए ओटीटी सौदे अभी भी सीमित हैं, जिससे उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है।

  • स्क्रीन संख्या बढ़ाने से थिएटर की पहुंच और रोजगार दोनों में सुधार हो सकता है—EY के अनुसार, स्क्रीन की संख्या लगभग दोगुनी करने से 6,600 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व और 1.25 लाख नए रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को मिड-बजट फिल्मों के लिए बेहतर आर्थिक मॉडल विकसित करना होगा, ताकि विविध कंटेंट को समर्थन मिल सके।
  • रिलीज रणनीति में संतुलन बनाए रखना होगा—थिएटर और ओटीटी दोनों को ध्यान में रखते हुए, रिलीज विंडो और प्रचार रणनीतियां तय करनी होंगी।

ओटीटी ऐप्स ने भारतीय मनोरंजन उद्योग में एक नया युग शुरू किया है। रिलीज विंडो का सिकुड़ना, ओटीटी की पहुंच और सब्सक्रिप्शन राजस्व में वृद्धि ने बॉक्स ऑफिस की दुनिया को चुनौती दी है। फिर भी, 2025 में रिकॉर्ड थिएटर कलेक्शन और ओटीटी रिलीज की संख्या में कमी यह दिखाती है कि थिएटर अभी भी जीवित हैं - लेकिन उन्हें बचाए रखने के लिए स्क्रीन विस्तार, रिलीज रणनीति और ओटीटी मॉडल में सुधार आवश्यक है।

वैसे आपको फिल्म देखना कहां पर पसंद है- थियेटर या ओटीटी पर?