
गग्गल एयरपोर्ट विस्तार के साथ भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा अहम बना हुआ है। (फोटो: AI. )
कांगड़ा के गग्गल एयरपोर्ट का विस्तार हिमाचल प्रदेश में बेहतर हवाई संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली बड़ी परियोजना है। लेकिन इसके साथ हजारों लोगों की जमीन, मकान और आजीविका का सवाल भी जुड़ा है। ऐसे में परियोजना की सफलता केवल जमीन अधिग्रहण पूरा करने से नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को समय पर उचित मुआवजा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन का भरोसा देने से तय होगी।
परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अगस्त 2026 तक जिला प्रशासन के अनुसार करीब 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और लगभग 2,285 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रभावितों को वितरित किया जा चुका है।
| भाग | मुख्य जानकारी | तथ्य |
|---|
| 1 | परियोजना | गग्गल एयरपोर्ट विस्तार |
| 1 | प्रभावित क्षेत्र | 14 राजस्व गांव |
| 1 | कुल भूमि | करीब 147.76 हेक्टेयर |
| 1 | निजी भूमि | करीब 122.66 हेक्टेयर |
| 2 | अधिग्रहण | करीब 90% पूरा |
| 2 | मुआवजा | करीब ₹2,285 करोड़ वितरित |
| 2 | प्रभावित परिवार | शुरुआती आकलन करीब 1,446 परिवार |
| 3 | सरकारी भूमि | 100+ परिवारों को राहत |
| 3 | लंबित मुद्दे | दावे, विवाद और पुनर्वास |
| 3 | जांच | भूमि सौदों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच |
गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार के लिए करीब 147.76 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इसमें लगभग 122.66 हेक्टेयर निजी और 25.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। यह जमीन कांगड़ा और शाहपुर तहसील के 14 राजस्व गांवों में आती है। परियोजना के शुरुआती आकलन में करीब 1,446 परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी।
एयरपोर्ट के विस्तार की योजना में रनवे को मौजूदा लंबाई से बढ़ा कर चरणबद्ध तरीके से 3,010 मीटर तक करने का प्रस्ताव है। इससे बड़े विमानों के संचालन और क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
जमीन अधिग्रहण केवल जमीन के मालिकों तक सीमित मुद्दा नहीं है। जिन परिवारों का घर, दुकान, खेती या रोज़गार अधिग्रहण क्षेत्र में आता है, उनके लिए यह जीवन में बड़े बदलाव का विषय है।
पिछले कुछ महीनों में प्रशासन ने मुआवजा वितरण की गति बढ़ाई है। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2,285 करोड़ रुपये प्रभावितों को दिए जा चुके हैं। लगभग 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा होने के साथ प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। कुछ मामलों में मुआवजा इसलिए रुका है क्योंकि दावेदारी विवाद, न्यायालय में लंबित मामले या एक ही जमीन पर एक से अधिक दावेदार हैं।
जुलाई में भी जिला प्रशासन ने बताया था कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब केवल जमीन लेने पर नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने पर भी जोर दे रही है।
हालांकि प्रभावित परिवारों के सामने एक अहम सवाल मुआवजे की राशि की पर्याप्तता का है। अधिग्रहण के समय तय दर और वर्तमान बाजार कीमत में अंतर होने पर परिवारों के लिए दूसरी जगह जमीन या मकान खरीदना मुश्किल हो सकता है। इसलिए मुआवजे के साथ पुनर्वास की व्यावहारिक व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना का सबसे संवेदनशील पहलू सरकारी जमीन पर वर्षों से रह रहे परिवारों का है। जुलाई 2026 में प्रदेश सरकार ने ऐसे 100 से अधिक परिवारों को भी राहत देने का निर्णय लिया था। जिला प्रशासन के अनुसार अगस्त तक इन परिवारों के लिए आगे की औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं।
22 अगस्त की जानकारी के मुताबिक सरकारी भूमि पर बने ढांचों से जुड़े प्रभावितों को करीब 16 करोड़ रुपये की राहत दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। संबंधित परिवारों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत समीक्षा के बाद राशि देने की बात कही गई है।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से सरकारी भूमि पर रह रहे परिवारों के लिए घर छोड़ना केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है। ऐसे परिवारों का पुनर्वास स्पष्ट नीति और समयबद्ध प्रक्रिया के साथ होना जरूरी है।
एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित परिवारों की चिंता केवल जमीन और मकान तक सीमित नहीं है। जिन लोगों की आजीविका खेती, छोटे कारोबार, दुकानों, होटल, पेट्रोल पंप या दूसरे स्थानीय रोजगार से जुड़ी है, उनके लिए स्थान परिवर्तन के बाद आय का सवाल खड़ा होगा।
किसी परिवार को मुआवजा मिल जाने से उसकी नियमित आय की समस्या अपने आप खत्म नहीं होती। खेती की जमीन खोने वाला किसान, दुकान खोने वाला कारोबारी या स्थानीय संस्थान में काम करने वाला कर्मचारी नई जगह पर वही आर्थिक अवसर हासिल कर पाएगा, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए पुनर्वास नीति में केवल मकान या भूमि का मुआवजा ही नहीं, बल्कि आजीविका बहाली और कौशल आधारित रोजगार सहायता को भी महत्व दिया जाना चाहिए। यह प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी होगा।
गग्गल एयरपोर्ट के आसपास जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच भी चल रही है। जुलाई और अगस्त 2026 में विजिलेंस तथा एसआईटी की जांच के बाद फर्जी कृषक प्रमाणपत्र और कथित बेनामी लेनदेन से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने की खबरें सामने आईं।
एक मामले में फर्जी कृषक प्रमाणपत्र के जरिए 100 कनाल से अधिक कृषि भूमि खरीदने के आरोपों की जांच की गई। वहीं एक अन्य मामले में कथित बेनामी लेनदेन को लेकर पांच नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
इन मामलों में अंतिम दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए जांच के आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि आरोप और जांच के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए। निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होगा कि जमीन सौदों में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार अब ऐसी स्थिति में है जहां भूमि अधिग्रहण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। अगली चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से बसाने की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुआवजा वितरण में तेजी आई है, लेकिन लंबित दावों और विवादों का समाधान भी जरूरी है।
प्रशासन के सामने चार प्रमुख प्राथमिकताएं होनी चाहिए-लंबित मुआवजे का शीघ्र निपटारा, सरकारी जमीन पर बसे पात्र परिवारों को राहत, विस्थापितों के पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था और भूमि सौदों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच।
पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजना हो सकती है
एयरपोर्ट विस्तार हिमाचल की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजना हो सकती है। लेकिन विकास का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब इसकी कीमत सबसे कमजोर परिवारों को असुरक्षा और बेरोजगारी के रूप में न चुकानी पड़े।
कांगड़ा एयरपोर्ट की कहानी इसलिए सिर्फ एक एयरपोर्ट के विस्तार की कहानी नहीं है। यह विकास और विस्थापन के बीच संतुलन की परीक्षा भी है। आने वाले समय में मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े फैसले तय करेंगे कि यह परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए संकट बनती है या बेहतर भविष्य का रास्ता।
Updated on:
25 Aug 2026 09:00 pm
Published on:
25 Aug 2026 09:00 pm
