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किशोर कुमार उर्फ मस्ती कुमारम: पढ़िए पेड़ों से बातें करने से लेकर उल्टी गियर में कार चलाने तक के किस्से

क्या आपने कभी सुना है कि एक गायक अपने गेटकीपर को निर्देश देता है कि किसी बंगाली को न आने दें? या फिर पेड़-पौधों से बात करने वाले कलाकार की शरारतें? आप पढ़िए किशोर कुमार की मजेदार शरारतों से भरे पांच किस्से, जिसे पढ़कर आप आज भी लोटपोट हो जाएंगे।
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Kishore Kumar

किशोर कुमार (CHatGpt)

किशोर कुमार की शरारतें उनकी गाने की प्रसिद्धि जितनी ही मशहूर हैं। उनका पूरा जीवन ही बेहद दिलचस्प और यादगार भी है। उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे मजेदार किस्से पेश हैं, जो उनकी नटखट और अनोखी शख्सियत को बखूबी दर्शाते हैं।

घर के बाहर लगाया बोर्ड: “Beware of Kishore”

किशोर कुमार ने अपने वॉर्डन रोड वाले फ्लैट के बाहर एक बोर्ड लगाया था जिस पर लिखा था “Beware of Kishore” यानी “किशोर से सावधान रहें”। यह बोर्ड देखकर कई लोग हैरान हो जाते थे, और कुछ तो वापस लौट भी जाते थे, यह सोचकर कि शायद कोई खतरनाक व्यक्ति अंदर हो सकता है। यह उनकी मजाकिया प्रवृत्ति का एक अनूठा उदाहरण था।

आधा मेकअप, आधा काम

एक बार जब उन्हें सेट पर कॉन्ट्रैक्ट का आधा ही भुगतान मिला था, तब वो मजाकिया अंदाज में आधा मेकअप और आधी मूंछें ही लगाकर शूटिंग के लिए पहुंच गए। उनसे जब वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा, “आधा पैसा, आधा काम, पूरा पैसा, पूरा काम”। यह किस्सा उनकी व्यावहारिकता और मस्ती भरे स्वभाव का बेहतरीन उदाहरण है।

गेटकीपर की वजह से हृषिकेश मुखर्जी का लौटना

फिल्म ‘आनंद’ के लिए निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी किशोर कुमार से मिलने उनके घर गए, लेकिन गेटकीपर ने उन्हें वापस लौटा दिया। दरअसल, किशोर कुमार ने पहले किसी बंगाली आयोजक से पैसे नहीं मिलने पर गेटकीपर को निर्देश दिया था कि अगर कोई बंगाली आए तो उसे वापस भेज दो। गेटकीपर ने यह निर्देश गंभीरता से लिया और मुखर्जी को ही वापस लौटा दिया। यह घटना उनकी व्यावहारिकता और हास्यबोध को दर्शाती है।

पेड़-पौधों से संवाद करते थे किशोर कुमार

किशोर कुमार अपने मथोली स्थित बंगले में पेड़-पौधों से बातें किया करते थे। उनके बेटे अमित कुमार और सहयोगियों के अनुसार, किशोर कुमार मानते थे कि पौधे जीवित होते हैं और वे उनसे बेहतर सुनते हैं, इसलिए वे अक्सर उनसे बातें करते थे। यह उनकी संवेदनशीलता और प्रकृति प्रेम को दर्शाता है।

जब उल्टी गियर में कार चलाकर सेट पर पहुंच गए किशोर

जब किसी निर्देशक ने कहा कि किशोर कुमार अपनी करियर दिशा गलत ले रहे हैं, तो उन्होंने मजाक में यह साबित करने के लिए अपनी कार उल्टी गियर में चलाकर फिल्म ‘भागती में शक्ति’ (1958) के सेट तक पहुंच गए। यह किस्सा उनकी शरारत और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

इन किस्सों में किशोर कुमार की नटखट, मस्ती भरी और कभी-कभी अजीबोगरीब हरकतें साफ झलकती हैं। वे संगीत और अभिनय में जितने गहरे थे, उतने ही जीवन में मस्ती और शरारत में भी। उनके ये किस्से आज भी हमें मुस्कुराने पर मजबूर कर देते हैं और याद दिलाते हैं कि कला के साथ जीवन को हल्के-फुल्के अंदाज में जीने का मजा भी कुछ और ही होता है।

जीवन का सबक

इन शरारतों से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में गंभीरता के साथ थोड़ी मस्ती और बेबाकी भी जरूरी है। किशोर कुमार ने इसे बेमिसाल अंदाज में जीया और हमें भी यही प्रेरणा देते हैं कि काम को गंभीरता से लें, लेकिन खुद को हँसी और शरारत से दूर न रखें। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कैसे कला और मस्ती को संतुलित किया जा सकता है।