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युवाओं की नई पसंद: सौर ऊर्जा से सिंचाई, कम खर्च में ज्यादा कमाई

Solar Power Irrigation : जानिए कैसे सौर ऊर्जा सिंचाई से घट रही है खेती की लागत और बढ़ रही है कमाई! पढ़ें PM-कुसुम योजना, एग्रीवोल्टाइक मॉडल और युवा किसानों के लिए इसके बेहतरीन फायदों के बारे में।
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Solar Power Irrigation

Solar Power Irrigation : सोलर सिंचाई के क्या हैं लाभ।

क्या खेती बिना बिजली बिल और डीजल खर्च के भी की जा सकती है? देश के कई युवा किसान अब इसका जवाब "हां" में दे रहे हैं। खेती में बढ़ती लागत और बिजली की अनियमित आपूर्ति के बीच सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप किसानों के लिए एक नया विकल्प बनकर उभरे हैं। इससे न केवल सिंचाई आसान हो रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।

पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था में किसान डीजल या ग्रिड बिजली पर निर्भर रहते हैं। डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली कटौती खेती की लागत बढ़ा देती हैं। इसके विपरीत, सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप एक बार स्थापित होने के बाद लंबे समय तक कम खर्च में काम करते हैं।

अध्ययनों से पता चला है कि सौर पंपों के उपयोग से सिंचाई की परिचालन लागत में 90 प्रतिशत से अधिक तक कमी आ सकती है। इससे किसानों को बिजली और ईंधन पर होने वाला खर्च बचता है और उनकी आमदनी बढ़ती है। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है, जिससे यह पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।

पीएम-कुसुम योजना से मिल रही है मदद

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना किसानों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना के तहत किसानों को सौर कृषि पंप लगाने और सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

योजना के प्रमुख लाभ

  • सौर कृषि पंप लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी
  • किसानों का सीमित आर्थिक योगदान
  • ग्रिड से जुड़े सौर पंपों के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचने की सुविधा
  • सिंचाई लागत में कमी और अतिरिक्त आय का अवसर

इस योजना का उद्देश्य लाखों किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।

एग्रीवोल्टाइक: एक खेत, दो फायदे

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे एग्रीवोल्टाइक कहा जाता है। इसमें खेत की जमीन पर सौर पैनल लगाए जाते हैं और उसी जमीन पर खेती भी जारी रहती है।

इस मॉडल से किसान एक ही भूमि से दो तरह का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, फसलों का उत्पादन और सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करके कमाई भी कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही ढंग से योजना बनाई जाए तो एग्रीवोल्टाइक मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युवा किसानों के लिए क्या हैं फायदे?

सिंचाई की लागत में कमी : सौर पंप लगने के बाद बिजली और डीजल पर खर्च काफी कम हो जाता है।

अतिरिक्त आय का अवसर : ग्रिड से जुड़े सिस्टम में किसान अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई कर सकते हैं।

पर्यावरण के अनुकूल खेती : सौर ऊर्जा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती है और प्रदूषण घटाती है।

आधुनिक कृषि की ओर कदम : नई तकनीक अपनाने से खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है।

युवा किसान क्या कर सकते हैं?

यदि आप सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई अपनाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने राज्य में पीएम-कुसुम योजना की स्थिति और पात्रता की जानकारी प्राप्त करें। कृषि विभाग, ऊर्जा विभाग या संबंधित पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है।

ग्रिड-कनेक्टेड सौर पंप लगाने वाले किसान बिजली बचाने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली बेचने का विकल्प भी चुन सकते हैं। वहीं जिन किसानों के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, वे एग्रीवोल्टाइक मॉडल पर भी विचार कर सकते हैं।

किन बातों का रखें ध्यान?

सौर ऊर्जा आधारित खेती के कई फायदे हैं, लेकिन कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं।

  • हर फसल सौर पैनलों की छाया में अच्छी पैदावार नहीं देती।
  • एग्रीवोल्टाइक सिस्टम का डिजाइन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार होना चाहिए।
  • बिजली खरीद दर (टैरिफ) और सरकारी नीतियां लाभ को प्रभावित कर सकती हैं।
  • जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई खेती को अधिक किफायती, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। पीएम-कुसुम जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सहायता देकर इस बदलाव को गति दे रही हैं। खासकर युवा किसानों के लिए यह केवल सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि कम लागत में बेहतर आय और आधुनिक कृषि की ओर बढ़ने का अवसर है।