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सरपत का गट्ठर लेकर थाने पहुंचे वह क्रांतिकारी, जिसने आजमगढ़ में अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी

Laxmikant Mishra : 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान आजमगढ़ के तरवां थाने में सरपत का गट्ठर लेकर अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती देने वाले गुमनाम क्रांतिकारी लक्ष्मीकांत मिश्र की अदम्य गाथा।
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laxmikant Mishra

laxmikant Mishra : जानें कौन थे लक्ष्मीकांत मिश्रा।

भारत छोड़ो आंदोलन की बात होती है तो अक्सर मुंबई, दिल्ली, पटना या बलिया जैसे बड़े केंद्रों का जिक्र होता है। लेकिन 1942 की अगस्त क्रांति की असली ताकत उन गांवों और कस्बों में थी, जहां साधारण लोगों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले में भी ऐसा ही एक नाम उभरा था - लक्ष्मीकांत मिश्र।

आज उनका नाम इतिहास की मुख्यधारा में बहुत कम दिखाई देता है, लेकिन स्थानीय स्मृतियों और स्वतंत्रता संग्राम के दस्तावेजों में वे उन लोगों में गिने जाते हैं जिन्होंने अंग्रेजी सत्ता को सीधी चुनौती दी। उनकी सबसे चर्चित पहचान उस घटना से जुड़ी है जब वे सरपत (सूखी घास) का गट्ठर लेकर तरवां थाने पहुंचे थे, ताकि अंग्रेजी राज के उस प्रतीक को आग लगाई जा सके।

1942: जब पूरे देश में उठी बगावत की लहर

8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा देते हुए भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। इसके बाद पूरे देश में अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनविद्रोह की स्थिति बन गई। कांग्रेस के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन गांव-गांव तक फैल गया।

पूर्वी उत्तर प्रदेश भी इस उबाल से अछूता नहीं था। आजमगढ़, मऊ और आसपास के इलाकों में लोगों ने थानों, डाकघरों, रेलवे लाइनों और सरकारी संस्थानों को अंग्रेजी सत्ता के प्रतीक के रूप में निशाना बनाना शुरू कर दिया।

तरवां थाना बना विद्रोह का केंद्र

अगस्त 1942 में आजमगढ़ के तरवां थाने के सामने बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। शुरुआत तिरंगा फहराने की मांग से हुई थी। 14 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानियों ने थाने पर तिरंगा फहराया, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारियों ने उसे उतार दिया। इससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। 18 अगस्त को क्रांतिकारी दोबारा बड़ी संख्या में पहुंचे और थानेदार से आत्मसमर्पण की मांग की। दबाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को झुकना पड़ा। इसके बाद थाने की कई वस्तुओं को आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना इतिहास में 'तरवां थाना कांड' के नाम से दर्ज हुई।

कौन थे लक्ष्मीकांत मिश्र?

लक्ष्मीकांत मिश्र आजमगढ़ के उन युवा स्वतंत्रता सेनानियों में थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय विवरणों के अनुसार वे तरवां थाना कांड से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल थे। उनकी पहचान किसी बड़े नेता या संगठन के पदाधिकारी के रूप में नहीं थी। वे उन हजारों युवाओं में से एक थे जिन्होंने गांधी के आह्वान को अपने गांव और इलाके में आंदोलन का रूप दिया। लेकिन एक घटना ने उन्हें स्थानीय इतिहास का हिस्सा बना दिया।

जब सरपत का गट्ठर लेकर थाने पहुंचे

कहा जाता है कि तरवां थाना कांड के दौरान लक्ष्मीकांत मिश्र अपने कंधे पर सरपत का गट्ठर लेकर पहुंचे थे। सरपत एक सूखी घास होती है जो जल्दी आग पकड़ लेती है। आंदोलनकारियों का उद्देश्य अंग्रेजी शासन के प्रतीक बने थाने को निष्क्रिय करना और जनता के विद्रोह का संदेश देना था।

लोक स्मृतियों में यह घटना आज भी सुनाई जाती है कि लक्ष्मीकांत मिश्र ने बिना किसी भय के आगे बढ़कर इस कार्रवाई में हिस्सा लिया। उनके इस साहसिक कदम ने आसपास के लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया। सिर्फ आग नहीं, यह सत्ता के खिलाफ संदेश था। तरवां थाना कांड को केवल एक हिंसक घटना के रूप में नहीं देखा जाता। उस दौर में थाने अंग्रेजी शासन की शक्ति और नियंत्रण के प्रतीक माने जाते थे। जब किसी थाने पर तिरंगा फहराया जाता था या उसे जनता के कब्जे में लिया जाता था, तो उसका अर्थ होता था कि स्थानीय लोग अब ब्रिटिश सत्ता को स्वीकार नहीं कर रहे। लक्ष्मीकांत मिश्र और उनके साथियों की कार्रवाई इसी व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा थी।

आंदोलन का असर

तरवां की घटना का असर केवल एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सरकारी अभिलेखों और स्मारक दस्तावेजों के अनुसार, इस घटना की खबर पूरे जिले में फैल गई और इससे लोगों का मनोबल बढ़ा। अधिक लोग आंदोलन में शामिल होने लगे और अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध तेज हुआ।

इतिहास में क्यों छूट गया नाम?

भारत की आजादी की लड़ाई में हजारों लोग शामिल थे, लेकिन इतिहास की किताबों में जगह सीमित रही। नतीजा यह हुआ कि स्थानीय स्तर पर बड़े योगदान देने वाले अनेक सेनानियों के नाम धीरे-धीरे सार्वजनिक स्मृति से ओझल हो गए।

लक्ष्मीकांत मिश्र भी ऐसे ही गुमनाम नायकों में शामिल हैं। उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर भले कम जाना जाता हो, लेकिन आजमगढ़ और पूर्वांचल के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनका योगदान याद किया जाता है।

🏷️ तथ्य📖 जानकारी
👤 नामलक्ष्मीकांत मिश्र
📍 क्षेत्रआजमगढ़, उत्तर प्रदेश
🇮🇳 आंदोलनभारत छोड़ो आंदोलन (1942)
प्रमुख पहचानतरवां थाना कांड के क्रांतिकारी
🔥 चर्चित घटनासरपत का गट्ठर लेकर थाने पहुंचना
🎯 उद्देश्यअंग्रेजी शासन को चुनौती देना
📜 ऐतिहासिक संदर्भतरवां थाना कांड
महत्वपूर्वांचल के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों में प्रमुख नाम

नोट: लक्ष्मीकांत मिश्र के बारे में उपलब्ध जानकारी मुख्यतः स्थानीय समाचार रिपोर्टों, क्षेत्रीय इतिहास और तरवां थाना कांड से जुड़े विवरणों पर आधारित है।