
madhya pradesh defence corridor aerospace hub: मध्यप्रदेश देश का दिल ही नहीं, अब रक्षा क्षेत्र बनकर भी हो रहा तैयार, जानिए कैसे? (AI Creative)
Madhya pradesh defence corridor aerospace hub: क्या आपने कभी सोचा है कि मध्यप्रदेश सिर्फ एक खूबसूरत राज्य ही नहीं, बल्कि अब भारत का रक्षा और एयरोस्पेस हब भी बन रहा है? यहां के नए मॉडल में ड्रोन से लेकर आधुनिक मिसाइलों तक, हर चीज पर काम हो रहा है। क्या आप जानना चाहेंगे कैसे?
मध्यप्रदेश अब केवल भारत का दिल नहीं, बल्कि देश का एक उभरता हुआ रक्षा और एयरोस्पेस हब भी बनता जा रहा है। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) से लेकर निजी उद्योग, रेयर अर्थ और टाइटेनियम थीम पार्क तथा ड्रोन-एयरोस्पेस सेक्टर, इस मॉडल में हर पहलू पर काम हो रहा है, जो राज्य की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जा रहा है।
मध्यप्रदेश में कई रक्षा PSUs पहले से सक्रिय हैं, जो आर्टिलरी, मिसाइल प्रोपेलेंट, सैन्य वाहन, ग्रेनेड कास्टिंग, हथियार और गोला-बारूद जैसे उत्पाद बनाते हैं, जिससे राज्य में अनेक सहायक (एंसिलरी) इकाइयों के लिए अवसर बनते हैं। साथ ही, यह भारत का पहला निजी क्षेत्र का स्मॉल आर्म्स निर्माण केंद्र भी है, यानी रक्षा उत्पादन में निजी भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।
इसकी सबसे बड़ी मिसाल है, 5 जुलाई 2026 को शिवपुरी में रखी गई नींव। जब अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने वहां 2,500 करोड़ रुपए के निवेश से दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी क्षेत्रीय मिसाइल इकोसिस्टम स्थापित करने की घोषणा की। यह सुविधा एक ही जगह कंपोज़िट प्रोपेलेंट और TNT उत्पादन के साथ मिसाइल सिस्टम इंटीग्रेशन को जोड़ेगी, जो भारत के निजी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली पहल है।
इससे करीब 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कुशल नौकरियां सृजित होने का अनुमान है और यह DRDO की कई अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों को उत्पादन स्तर पर लाने में सहायक होगी। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।
वहीं इस दौरान अडानी डिफेंस के निदेशक जीत अडानी ने कहा कि 'ग्वालियर और शिवपुरी साथ मिलकर मध्यप्रदेश में रक्षा नवाचार के दो इंजन बनेंगे।' ग्वालियर में कंपनी की मौजूदा फैक्ट्री पहले से ही सेना को लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल और कार्बाइन की आपूर्ति कर रही है।
भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित यह पार्क भारत का पहला 'रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क' है, जिसका उद्घाटन 9 मई 2026 को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती ने किया।
यह पार्क 'लैब-टू-प्रोडक्ट' अवधारणा पर आधारित है, जहां भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित तकनीकों को औद्योगिक उपयोगिता के लिए प्रदर्शित किया जाता है। इसे इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) ने विकसित किया है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन काम करती है।
यहां लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम जैसी रेयर अर्थ धातुओं और टाइटेनियम के मिनी-प्लांट्स स्थापित किए गए हैं, जो स्टार्टअप्स और उद्योगों को इन सामग्रियों के उत्पादन और उपयोग के लिए प्रेरित करेंगे। यह पहल रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
मध्यप्रदेश में ड्रोन निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 'Drone Promotion and Usage Policy 2025' लागू बताई जाती है, जो ड्रोन निर्माण और निर्यात को प्रोत्साहित करती है।
राज्य में 25 सरकारी और 3 निजी एयरस्ट्रिप्स भी उपलब्ध हैं, जो ड्रोन परीक्षण, MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) तथा एयरोस्पेस गतिविधियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। ग्वालियर में एक ड्रोन स्कूल पहले से खोला जा चुका है, और चार और स्कूल जल्द स्थापित किए जाने की योजना बताई जा रही है।
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकल-खिड़की (सिंगल-विंडो) सुविधा देता है। राज्य सरकार एक अलग 'Defence Production Investment Promotion Policy' पर भी काम कर रही बताई जाती है, जो रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए है। हालांकि यह फिलहाल प्रस्तावित नीति ही है।
इसके साथ भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-शिवपुरी-गुना जैसे औद्योगिक कॉरिडोर भी विकसित किए जा रहे हैं, जो रक्षा और एयरोस्पेस उद्योगों के लिए विशेष अवसर देंगे।
कहना होगा कि मध्यप्रदेश का रक्षा कॉरिडोर मॉडल अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक ठोस और बहुआयामी रणनीति बन चुका है। शिवपुरी में अडानी का 2,500 करोड़ का मिसाइल इकोसिस्टम, भोपाल का रेयर अर्थ-टाइटेनियम पार्क और ड्रोन-एयरोस्पेस नीति समर्थन, इन सबका संयोजन राज्य को एक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त रक्षा हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत के रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग को नई दिशा दे सकता है।
Updated on:
26 Aug 2026 10:28 am
Published on:
26 Aug 2026 10:28 am
