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रिश्तों में बढ़ रहा है ‘मेंटल लोड’, जानिए कारण और ‘Fair Play’ मॉडल जैसे असल समाधान

क्या रिश्ते में सारी जिम्मेदारियों का मानसिक बोझ एक ही साथी पर है? जानिए मेंटल लोड क्या होता है, इसके नुकसान और जिम्मेदारियों को बराबर बांटने के आसान तरीके।
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भारत

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Ravi Gupta

Jul 27, 2026

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प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

रिश्ते तभी मजबूत बनते हैं जब दोनों साथी जिम्मेदारियों को मिलकर निभाएं। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि घर के कई छोटे-बड़े कामों की योजना बनाना, जरूरी बातें याद रखना और हर चीज को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर आ जाती है। इसे ही मेंटल लोड (Mental Load) या मानसिक बोझ कहा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अदृश्य जिम्मेदारी धीरे-धीरे तनाव, थकान और रिश्तों में असंतोष का कारण बन सकती है।

हाल के वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर हुए अध्ययनों में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस बोझ को समय रहते पहचाना और साझा नहीं किया गया तो यह रिश्तों में दूरी बढ़ा सकता है।

मेंटल लोड, जो दिखता नहीं

मेंटल लोड केवल झाड़ू-पोंछा, खाना बनाना या कपड़े धोना जैसे शारीरिक काम नहीं हैं। इसमें वे सभी मानसिक जिम्मेदारियां शामिल होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं, लेकिन लगातार दिमाग में चलती रहती हैं।

जैसे -

  • बिजली, पानी और अन्य बिल समय पर भरना याद रखना।
  • बच्चों की स्कूल गतिविधियों और डॉक्टर की अपॉइंटमेंट का ध्यान रखना।
  • घर का राशन कब खत्म होगा, इसकी योजना बनाना।
  • परिवार के जन्मदिन, त्योहार या अन्य जरूरी कार्यक्रमों की तैयारी करना।
  • घर के हर सदस्य की जरूरतों का पहले से अनुमान लगाना।
  • रिश्तेदारों के साथ भी ताल-मेल बनाए रखना।
  • हर किसीको खुश रखना।

यही वजह है कि कई बार एक साथी खुद को केवल परिवार का सदस्य नहीं, बल्कि पूरे घर का "केयरगिवर" महसूस करने लगता है।

क्यों बढ़ता है तनाव?

मनोविज्ञान के अनुसार, जब एक व्यक्ति लगातार योजना बनाने, निर्णय लेने और हर छोटी-बड़ी बात याद रखने की जिम्मेदारी निभाता है, तो उसका मानसिक दबाव बढ़ने लगता है। इसका असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता।

इससे व्यक्ति में लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, चिंता और भावनात्मक दूरी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। कई बार दूसरा साथी यह समझ ही नहीं पाता कि सामने वाला इतना तनाव क्यों महसूस कर रहा है, क्योंकि यह बोझ दिखाई नहीं देता।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक यह असंतुलन बने रहने पर रिश्तों में संवाद कम होने लगता है और विवाद बढ़ सकते हैं।

सबसे पहले जिम्मेदारियों की सूची बनाएं

मेंटल लोड कम करने की शुरुआत पहचान से होती है। दोनों साथी मिलकर उन सभी जिम्मेदारियों की सूची तैयार करें जो रोजमर्रा के जीवन में निभाई जाती हैं।

इस सूची में केवल शारीरिक काम ही नहीं, बल्कि योजना बनाने और याद रखने वाले काम भी शामिल करें। जब सभी जिम्मेदारियां कागज पर सामने होती हैं, तब यह समझना आसान हो जाता है कि किस व्यक्ति पर कितना मानसिक दबाव है।

काम को स्पष्ट तरीके से बांटें

विशेषज्ञों का मानना है कि हर जिम्मेदारी को बिल्कुल 50-50 बांटना जरूरी नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक काम का जिम्मेदार व्यक्ति स्पष्ट हो।

उदाहरण के लिए यदि बच्चों की स्कूल फीस भरने की जिम्मेदारी एक साथी की है, तो उसे बार-बार याद दिलाने की जरूरत न पड़े। इसी तरह राशन, मेडिकल अपॉइंटमेंट या घरेलू बिल जैसे कामों का भी स्पष्ट बंटवारा होना चाहिए।

इससे अदृश्य मानसिक जिम्मेदारियां भी बराबर बंटने लगती हैं।

बातचीत का तरीका भी है अहम

रिश्तों में संवाद सबसे प्रभावी समाधान माना जाता है। लेकिन बातचीत का तरीका सही होना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस विषय पर चर्चा शांत माहौल में करें। आरोप लगाने के बजाय अपनी भावनाएं साझा करें। उदाहरण के लिए, "तुम कभी मदद नहीं करते" कहने की बजाय "मैं लगातार जिम्मेदारियां निभाते हुए थकान महसूस कर रहा/रही हूं" जैसे वाक्य बातचीत को सकारात्मक दिशा देते हैं।

इस तरह की भाषा सामने वाले को डिफेंसीव होने के बजाय समस्या समझने का अवसर देती है।

समय-समय पर करें समीक्षा

जिम्मेदारियां एक बार बांट देने से समस्या हमेशा के लिए खत्म नहीं होती। नौकरी, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य या अन्य परिस्थितियों के अनुसार जिम्मेदारियां बदल सकती हैं।

इसलिए सप्ताह या महीने में एक बार बैठकर यह देखना उपयोगी हो सकता है कि कामों का बंटवारा अभी भी संतुलित है या उसमें बदलाव की जरूरत है।

Couples Counseling की मदद लें

यदि कई बार बातचीत के बावजूद तनाव कम नहीं हो रहा है, तो दंपति परामर्श (Couples Counseling) एक अच्छा विकल्प हो सकता है। प्रशिक्षित काउंसलर दोनों पक्षों को बेहतर संवाद और जिम्मेदारियों के संतुलन में मदद कर सकते हैं।

यदि आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां अनुमति दें, तो सफाई, खाना बनाने या बच्चों की देखभाल जैसे कुछ कामों के लिए बाहरी सहायता लेना भी मानसिक बोझ कम करने का व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

'Fair Play' मॉडल क्या है?

अमेरिकी लेखिका ईव रोडस्की (Eve Rodsky) ने अपनी पुस्तक Fair Play में घरेलू जिम्मेदारियों को व्यवस्थित ढंग से बांटने का मॉडल प्रस्तुत किया है। इसमें अलग-अलग जिम्मेदारियों को कार्ड के रूप में विभाजित किया जाता है और जिस व्यक्ति के पास कोई कार्ड होता है, वह उस काम की योजना बनाने, उसे पूरा करने और उसकी जिम्मेदारी निभाने का पूरा दायित्व उठाता है।

इस मॉडल का उद्देश्य केवल काम बांटना नहीं, बल्कि मानसिक योजना और जिम्मेदारी को भी समान रूप से साझा करना है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि दोनों साथी अपने दोस्तों, शौक और आत्म-देखभाल के लिए भी समय निकालें, ताकि मानसिक तनाव कम हो सके।

हेल्दी रिलेशनशिप के लिए जरूरी

मेंटल लोड कोई छोटी या काल्पनिक समस्या नहीं है। यह उन अदृश्य जिम्मेदारियों का बोझ है, जो समय के साथ मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसकी पहचान करना, जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से साझा करना, खुलकर संवाद करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना रिश्तों को अधिक संतुलित और स्वस्थ बना सकता है।

जब दोनों साथी केवल काम ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों की मानसिक योजना भी साझा करते हैं, तब रिश्तों में विश्वास, सम्मान और संतुष्टि स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।