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Mulethi Side Effects: ज्यादा मुलेठी खाने से शरीर में गिर सकता है पोटैशियम, जानिए सुरक्षित मात्रा और सावधानियां

मुलेठी का अधिक सेवन बन सकता है सेहत के लिए खतरा! जानिए कैसे जरूरत से ज्यादा मुलेठी खाने से बढ़ सकता है बीपी और गिर सकता है पोटैशियम का स्तर।
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Chitra Badoliya

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Oct 11, 2026

मुलेठी के फायदे और नुकसान ( Image: Chat Gpt)

भारतीय रसोई और आयुर्वेद में मुलेठी (Licorice Root) को एक चमत्कारी औषधि का दर्जा हासिल है। बदलते मौसम में जब भी गला बैठता है या खांसी सताती है, तो दादी-नानी का पहला नुस्खा मुलेठी का एक छोटा सा टुकड़ा मुंह में दबाने का ही होता है। स्वाद में मीठी और तासीर में ठंडी मुलेठी केवल गले को ही आराम नहीं देती, बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं में भी राहत पहुंचाती है। हालांकि, किसी भी प्राकृतिक औषधि की तरह इसका अत्यधिक और अनियंत्रित सेवन भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

मुलेठी के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक शोध दोनों ही सीमित मात्रा में मुलेठी के सेवन को बेहद असरदार मानते हैं।

गले की खराश और श्वसन तंत्र में राहत: मुलेठी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एक्सपेक्टोरेंट गुण बलगम को ढीला कर बाहर निकालते हैं। यह सूखी खांसी, ब्रोंकाइटिस और गले के संक्रमण में तुरंत आराम देती है।

पाचन और एसिडिटी के लिए रामबाण: मुलेठी पेट की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक लेयर बनाती है। यह सीने में जलन, पेप्टिक अल्सर और एसिड रिफ्लक्स को शांत करने में मदद करती है।

इम्यूनिटी और लिवर की सुरक्षा: इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और लिवर को डिटॉक्स करने में सहायक होते हैं।

त्वचा में निखार: एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण मुलेठी का लेप त्वचा के दाग-धब्बे, पिगमेंटेशन और मुंहासों को कम करने में भी लोकप्रिय है।

अति से हानि: मुलेठी का अधिक सेवन क्यों है खतरनाक?

मुलेठी के अत्यधिक उपयोग से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा इसका प्रमुख सक्रिय यौगिक 'ग्लाइसीरिज़िन' (Glycyrrhizin) है। यह यौगिक चीनी से लगभग 50 गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन शरीर में इसकी अत्यधिक मात्रा गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन): जब ग्लाइसीरिज़िन शरीर में अत्यधिक जमा होता है, तो यह तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के टूटने की प्रक्रिया को बाधित करता है। इससे शरीर में सोडियम और पानी रुकने लगता है और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है।

पोटैशियम का गिरता स्तर (हाइपोकैलिमिया): मुलेठी का अधिक सेवन किडनी से पोटैशियम के उत्सर्जन को बढ़ा देता है। पोटैशियम की भारी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन और दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना (एरिदमिया) जैसी स्थिति बन सकती है।

शरीर में सूजन और वॉटर रिटेंशन: सोडियम संतुलन बिगड़ने से पैरों, टखनों और चेहरे पर असामान्य सूजन (एडिमा) की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था और हार्मोनल असंतुलन: गर्भवती महिलाओं को मुलेठी के अधिक सेवन से सख्त परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह प्री-टर्म लेबर (समय पूर्व प्रसव) के जोखिम को बढ़ा सकती है।

सुरक्षित उपयोग और जरूरी सावधानियां

  • दैनिक मात्रा: सामान्य रूप से दिनभर में 1 से 3 ग्राम मुलेठी पाउडर या एक छोटा टुकड़ा ही पर्याप्त होता है।
  • लगातार सेवन से बचें: इसे लगातार 4 से 6 सप्ताह से अधिक समय तक न लें। यदि लंबे समय तक इस्तेमाल करना हो, तो बीच में कुछ हफ्तों का ब्रेक जरूर दें।
  • किनके लिए है सख्त मनाही: हाई ब्लड प्रेशर, किडनी रोग, हृदय रोग और डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य के परामर्श के बिना इसका नियमित सेवन न करें।
  • आयुर्वेद का मूल सिद्धांत ही संतुलन पर टिका है। मुलेठी निसंदेह एक बेहतरीन प्राकृतिक उपचार है, लेकिन इसे 'दवा' की तरह सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, न कि रोजाना की आदत बना लेना चाहिए।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice), जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। मुलेठी या किसी भी अन्य जड़ी-बूटी का नियमित या औषधीय रूप से उपयोग करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या प्रमाणित आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि आप पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज या किडनी संबंधी समस्या से पीड़ित हैं अथवा गर्भवती हैं।