
NDA journey from 1998 to 2026 Atal bihari bajpayee to narendra modi: AI Creative
NDA journey from 1998 to 2026: भारतीय राजनीति में कुछ गठबंधन ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं जीते, बल्कि सत्ता के बदलते समीकरणों को भी नई दिशा दी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ऐसी ही एक राजनीतिक यात्रा का नाम है। 1998 में कई क्षेत्रीय दलों के साथ शुरू हुआ यह गठबंधन आज भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक गठबंधनों में शामिल है। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चलाने के दौर से लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार चुनावी सफलताओं तक, NDA ने करीब तीन दशकों में कई राजनीतिक मोड़ देखे हैं।
इस दौरान गठबंधन ने परमाणु परीक्षण से लेकर आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों तक कई महत्वपूर्ण नीतिगत पड़ाव देखे, वहीं गठबंधन की राजनीति, सहयोगी दलों के बदलते रुख और विभिन्न विवादों ने इसकी दिशा भी प्रभावित की। 2001 से 2026 तक NDA की कहानी सिर्फ सत्ता में रहने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय गठबंधन राजनीति के बदलते स्वरूप, उसके फैसलों, चुनौतियों और विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यहां जानिए कैसे NDA ने भारतीय राजनीति में अपनी जगह बनाई और समय के साथ उसका स्वरूप किस तरह बदलता गया।
NDA की स्थापना 15 मई 1998 को हुई थी, जब भाजपा ने कई क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर कांग्रेस के खिलाफ एक गठबंधन बनाया था। 1999 के आम चुनाव में NDA ने भारी बहुमत प्राप्त किया और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। यह पहला ऐसा गठबंधन था, जिसने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया।
2004 के आम चुनाव में NDA को हार का सामना करना पड़ा और वह सत्ता से बाहर हो गया। उस समय एल. के. आडवाणी गठबंधन के अध्यक्ष बने। इसके बाद गठबंधन में कई बदलाव आए। इनमें 2003 में समता पार्टी का NDA से अलग होना और जेडी(यू) का 2013 में गठबंधन छोड़ना, फिर 2017 में पुनः जुड़ने जैसे घटनाक्रम शामिल हैं।
2014 में NDA ने फिर से सत्ता हासिल की। और इस बार देश की सत्ता नरेंद्र मोदी के हाथों आई और वे प्रधानमंत्री बने। भाजपा ने अकेले स्पष्ट बहुमत हासिल किया। लेकिन, गठबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। 2019 में NDA ने और अधिक मजबूत प्रदर्शन किया, सीटों की संख्या और वोट शेयर दोनों में वृद्धि हुई।
2024 के आम चुनाव में भाजपा अकेले बहुमत से दूर रही। उसे केवल 240 सीटें मिलीं, जबकि सरकार बनाने के लिए 272 की आवश्यकता थी। NDA ने कुल मिलाकर 293 सीटें प्राप्त कीं। इससे गठबंधन सरकार बनी। यह मोदी का तीसरा कार्यकाल था, लेकिन पहली बार उन्हें क्षेत्रीय सहयोगियों टीडीपी और जेडी(यू) पर निर्भर रहना पड़ा।
राजनीतिक वैज्ञानिक एसवरन श्रीधरन ने इस सरकार को 'surplus majority coalition without a majority party' यानी एक ऐसा गठबंधन बताया है जिसमें कोई एक दल बहुमत में नहीं है, लेकिन गठबंधन में पर्याप्त सीटें हैं। यह भारत में एक नया राजनीतिक मॉडल है। एक शोधपत्र (जनवरी–मार्च 2026) में यह भी कहा गया है कि NDA ने गठबंधन राजनीति का उपयोग अपनी केंद्रीय स्थिति को मजबूत करने के लिए किया, जबकि UPA में साझेदारी अधिक होती थी।
NDA ने 1999-2004 के दौर में एक स्थिर सरकार दी, जो उस समय की अस्थिरता के बीच एक बड़ी उपलब्धि थी। मोदी के नेतृत्व में, गठबंधन ने कोविड-19 महामारी और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच राजनीतिक स्थिरता बनाए रखी, जैसा कि मोदी ने जून 2026 में गठबंधन नेताओं को संबोधित करते हुए कहा।
कहना होगा कि, 2001 से 2026 तक NDA की यात्रा एक लंबा और बदलता हुआ राजनीतिक सफर रही है। शुरुआती सफलता, हार, फिर वापसी, और अंततः एक नए तरह के गठबंधन मॉडल तक का विकास। यह कहानी बताती है कि भारत में गठबंधन राजनीति केवल अस्थिरता नहीं, बल्कि स्थिरता और नेतृत्व का एक नया रूप भी हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि यह गठबंधन किस दिशा में आगे बढ़ता है और देश की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
Updated on:
12 Sept 2026 03:13 pm
Published on:
12 Sept 2026 03:13 pm
