
चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की मौत (सोर्स- Chatgpt)
निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार सुबह हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में अपनी चाय की दुकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, उनका शव सप्त सरोवर रोड पर लाल माता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला है। शहर कोतवाली के SHO कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सप्त ऋषि चौकी को सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
SHO कुंदन सिंह राणा के मुताबिक, सप्त ऋषि चौकी को मिल सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने सुरेंद्र कोली के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस को घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस परिवारिक विवाद की आशंका जता रही है और सभी एंगल से जांच कर रही है। कोली का परिवार अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के मंगरुखल गांव का है, उन्हें सूचित कर दिया गया है।
सुरेंद्र कोली की उम्र 50 वर्ष से अधिक थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मामले में बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार आ गया था। पिछले कुछ महीनों से वे यहां रह रहे थे और हाल ही में भूपतवाला में किराए पर चाय की दुकान चला रहे थे। इससे पहले वे सुरक्षा गार्ड का काम भी करते रहे। करीब 19 साल जेल में रहने के बाद वे आखिरकार आजाद हुए थे।
निठारी कांड देश के सबसे सनसनीखेज और भयानक मामलों में से एक रहा है। नोएडा के निठारी गांव (सेक्टर-31) में 2005-06 के दौरान कई बच्चे और युवतियां गायब हो रहे थे। ज्यादातर गरीब परिवारों के थे। पुलिस शुरू में इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही थी। 29 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (डी-5) के पीछे नाले से बच्चों की खोपड़ियां, मानव कंकाल और कपड़ों के अवशेष मिलने के बाद पूरा देश स्तब्ध रह गया।
कम से कम 19 बच्चों और महिलाओं के अवशेष बरामद होने की खबरें आईं। पंढेर व्यापारी थे और कोली उनके घरेलू नौकर के रूप में काम करते थे। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। एजेंसी ने कई FIR दर्ज कर हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत नष्ट करने के आरोप लगाए। कोली पर कई मामलों में मुकदमे चले। विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई थी। आरोपों में शरीर के अंग काटना और यहां तक कि नरभक्षण जैसी भयावह बातें भी शामिल थीं।
हालांकि, बाद की अदालती सुनवाइयों में जांच में गंभीर खामियां सामने आईं। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूत पर्याप्त नहीं थे, कबूलनामे संदिग्ध थे और जांच में कई प्रक्रियागत लोप थे। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन बरी के फैसलों के खिलाफ सीबीआई और पीड़ित परिवारों की अपीलें खारिज कर दीं।
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ) ने क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर करते हुए अंतिम मामले में भी कोली को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि सबूत केवल अनुमान पर आधारित थे, फॉरेंसिक समर्थन कमजोर था और ऑर्गन ट्रेड जैसे लीड्स की जांच नहीं की गई। कोली को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया। रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन उनकी मौत की घटना ने निठारी कांड को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
Updated on:
18 Sept 2026 03:24 pm
Published on:
18 Sept 2026 03:23 pm
