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प्री-एक्लेम्पसिया का खतरा: इस बीमारी से हर साल होती है 42000 महिलाओं की मौत, जानिए लक्षण और बचाव

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनमें ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी शामिल है।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Oct 09, 2026

Pre-eclampsia risk during pregnancy

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनमें ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी शामिल है। कई बार गर्भवती महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) यानी उच्च रक्तचाप को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन ऐसा करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

हर साल होती है 42 हजार महिलाओं की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं महिलाओं की मौत और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। ऐसे में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है। WHO की मानें तो दुनियाभर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इनमें प्री-एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia) जैसी गंभीर स्थिति भी शामिल है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़े विकारों के कारण हर साल दुनियाभर में लगभग 42 हजार महिलाओं की मौत होने का अनुमान है। इसके अलावा, इन समस्याओं के चलते पांच लाख से ज्यादा मृत-जन्म और नवजात शिशुओं की मौत के मामले भी सामने आते हैं। आंकड़े बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कितनी महत्वपूर्ण है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित इलाज और निगरानी से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।

प्री-एक्लेम्पसिया क्या है?

प्री-एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia) गर्भावस्था से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद हाई ब्लड प्रेशर विकसित होता है। इसके साथ शरीर के अंगों, खासकर किडनी या लिवर पर असर पड़ने के संकेत मिल सकते हैं। कई बार यूरिन में प्रोटीन की मात्रा भी पाई जाती है। अगर समय पर इसका पता न चले और इलाज न मिले तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखाई देना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, चेहरे और हाथों में अचानक सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, कई महिलाओं में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है।

महिलाओं की जान बचाने के लिए WHO की पहल

WHO ने गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली मौतों और जटिलताओं को रोकने के लिए 2026 से 2035 और उसके बाद तक की वैश्विक रणनीति पेश की है। इसका उद्देश्य बेहतर जांच, जरूरी दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और समय पर आपातकालीन इलाज को बढ़ावा देना है। डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर यूरिन में प्रोटीन की मात्रा की जांच और अन्य टेस्ट भी कराए जाते हैं।

स्थिति के अनुसार डॉक्टर दवाएं देते हैं और मां-बच्चे की निगरानी करते हैं। गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर का असर बच्चे के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में आगे चलकर हाई बीपी, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डिलीवरी के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए।

प्रीक्लेम्पसिया के प्रमुख लक्षण

  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): यह इसका सबसे मुख्य संकेत है। डॉक्टर नियमित जांच के दौरान इसे मापते हैं।
  • पेशाब में प्रोटीन आना (Proteinuria): गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित होने से पेशाब में प्रोटीन लीक होने लगता है।
  • अचानक और तेज सूजन: चेहरे, हाथों या पैरों में अचानक बहुत ज्यादा सूजन आना (जबकि गर्भावस्था में हल्की सूजन सामान्य हो सकती है)।
  • लगातार तेज सिरदर्द: ऐसा सिरदर्द जो सामान्य दर्द निवारक दवाओं से ठीक न हो।
  • दृष्टि में बदलाव: धुंधला दिखना, आंखों के आगे चमक या काले-पीले धब्बे दिखाई देना, या रोशनी से संवेदनशीलता।
  • पेट में दर्द: पेट के ऊपरी हिस्से में (पसलियों के नीचे या दाहिने तरफ) तेज दर्द।
  • मतली और उल्टी: गर्भावस्था के दूसरे हिस्से में अचानक जी मिचलाना या उल्टी होना।
  • वजन का अचानक बढ़ना: कुछ ही दिनों में शरीर के वजन में तेजी से वृद्धि होना (शरीर में पानी जमा होने के कारण)।