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संजू सैमसन: संघर्ष से ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ तक का सफर

Comeback: एक खिलाड़ी की वापसी सिर्फ खेल के मैदान पर नहीं, बल्कि उसकी मजबूत मानसिकता के दम पर भी होती है। संजू सैमसन की यह प्रेरणादायक कहानी आपको दिखाएगी, कैसे संघर्ष और तकनीकी सुधार ने उन्हें टी20 विश्व कप में सितारा बना दिया!
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Sanjana Kumar

Sep 12, 2026

Comeback Sanju

Comeback Sanju: AI Creative

Comeback: कभी प्लेइंग-11 से बाहर बैठे संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप 2026 में वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना कम ही लोगों ने की थी। शुरुआती मुकाबलों की निराशा को पीछे छोड़ते हुए, वेस्टइंडीज के खिलाफ वर्चुअल क्वार्टर फाइनल में उनकी मैच जिताऊ पारी ने भारत के अभियान को नई दिशा दे दी।

कप्तान रोहित शर्मा के भरोसे और साथी खिलाड़ियों के सपोर्ट ने उन्हें इस मुश्किल दौर से उबरने की ताकत दी। यही जज्बा आगे चलकर उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाकर भारत की खिताबी जीत का अहम हिस्सा बना गया। क्या आप जानना चाहेंगे गिरकर उठे और तूफान बनकर लौटे संजू सैमसन की कहानी?

संकट से ही कर ली वापसी की शुरुआत

न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में संजू सैमसन सिर्फ 46 रन ही बना सके, जिससे उनकी विश्व कप में जगह खतरे में दिखी। शुरुआती मैचों में टीम ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, लेकिन सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम प्रबंधन ने एक रणनीतिक बदलाव किया, दो विकेटकीपर (संजू और इशान किशन) के साथ शुरुआत।

तकनीकी सुधार के साथ ही मानसिक तैयारी भी की

बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने बताया कि संजू की तकनीक में सुधार के लिए महीनों तक काम हुआ है। खासकर उनके ट्रिगर मूवमेंट और बैकफुट की स्थिति पर ध्यान दिया गया, जिससे उनका बैलेंस बेहतर हुआ और शॉट्स में स्थिरता आई। संजू ने खुद बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया और फोन बंद कर दिए, बाहरी शोर से दूरी बनाकर अपने मूल तकनीक और मानसिक स्थिति पर काम किया।

महाकुंभ में की धमाकेदार वापसी

सुपर-8 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ संजू ने 97 रन की तूफानी पारी खेलकर टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 42 गेंदों में 89 रन की विस्फोटक पारी ने भारत को फाइनल में पहुंचाया, जहां उन्होंने फाइनल में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा। इस प्रदर्शन के दम पर संजू सैमसन 321 रन बनाकर भारत के लिए एक ही संस्करण में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने, और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला।

कोच की भरोसेमंद सलाह आई काम

कोच सितांशु कोटक ने याद किया कि संजू ने उनसे कहा था, 'कोट्स भाई, चिंता मत करो'- जब टीम को मेरी जरूरत होगी, मैं योगदान दूंगा।' यह आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती उनकी वापसी की नींव बनकर उभरी।

वापसी के बाद की चुनौतियां भी

विश्व कप जीत के चार महीने बाद, जुलाई 2026 में बीसीसीआई ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम में संजू को शामिल नहीं किया। इसमें वैभव सूर्यवंशी को मौका मिला, लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट नहीं किया कि यह आराम है या ड्रॉप। यह संकेत देता है कि चयनकर्ताओं को उनकी निरंतरता को लेकर अभी भी संदेह है।

तो क्या यह वापसी का अंत है?

टी20 विश्व कप में संजू की वापसी ने साबित कर दिया कि जब तकनीक, मानसिक तैयारी और अवसर मिल जाएं, तो खिलाड़ी कमाल कर सकता है। लेकिन चयन में उनकी जगह स्थिर नहीं दिख रही। अब आगे का रास्ता उनके प्रदर्शन और चयनकर्ताओं के भरोसे पर निर्भर करेगा।

क्या हो सकती है भविष्य की तस्वीर?

अगर संजू घरेलू और आईपीएल में लगातार प्रदर्शन करते रहे, तो उन्हें फिर से टीम में मौका मिल सकता है। लेकिन निरंतरता ही उनकी वापसी की कहानी को स्थायी बना सकती है। युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक सबक है, संघर्ष के बाद वापसी संभव है, लेकिन उसे बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।