13 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

क्या आपको पता है स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल से कैसे बदल रही है आपकी रोजमर्रा की जिंदगी?

Smart Traffic Signals: आपके शहर का ट्रैफिक सिग्नल भी स्मार्ट हो सकता है, अब एआई के जरिए सिग्नल खुद-ब-खुद जाम को खत्म कर सकते हैं और प्रदूषण पर लगाम कस सकते हैं, जानिए भारत के शरहों में यह कैसे संभव हो रहा है!
3 min read
Google source verification

image

Sanjana Kumar

Sep 11, 2026

Smart Traffic Signals

Smart Traffic Signals: AI Creative

Smart Traffic Signals: शहरों में ट्रैफिक सिग्नल अब स्मार्ट हो रहे हैं, यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में परिवर्तन की शुरुआत है। एआई-सक्षम सिग्नल सिस्टम से जाम, प्रदूषण और नियम उल्लंघन पर नियंत्रण की उम्मीद बढ़ रही है।

जानिए स्मार्ट सिग्नल क्या हैं और कैसे काम करते हैं

एआई-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, जैसे एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (ATCS) या इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), कैमरों और सेंसर की मदद से वास्तविक समय में वाहनों की संख्या और कतार की लंबाई मापते हैं। इसके आधार पर ग्रीन और रेड सिग्नल का समय अपने आप बदल जाता है, जिससे ट्रैफिक का प्रवाह बेहतर होता है और इंतजार कम होता है।

आज जयपुर में क्या हो रहा है

जयपुर के रामबाग सर्किल पर 3 जून से 11 जुलाई 2026 तक 39 दिनों का ITMS ट्रायल हुआ। इस दौरान बिना किसी पुलिस हस्तक्षेप के 4.88 लाख से अधिक वाहन पार हुए। प्रत्येक लेन में 8 से 45 सेकंड तक समय की बचत हुई और औसत ग्रीन टाइम 33.63 सेकंड दर्ज किया गया। इस बदलाव से कुल 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ, यानी प्रतिदिन लगभग 65 किलो की बचत हुई। अब जयपुर में 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों पर इस सिस्टम को लागू करने की तैयारी चल रही है।

गुरुग्राम में चालान की जानकारी अब सिग्नल पर दिखेगी

हरियाणा के गुरुग्राम में सोहना चौक पर एआई-सक्षम डिजिटल स्क्रीन लगाई गई है। यह स्क्रीन वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर पढ़कर ई-चालान डेटाबेस से जुड़ी जानकारी दिखाती है, जैसे बकाया चालान की संख्या, जुर्माने की राशि और यदि पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) समाप्त हो चुका हो तो उसकी जानकारी भी। यह पहल अभी परीक्षण के दौर में है और इसका उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि नियमों का पालन बढ़ाना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है। यदि यह सफल रही, तो इसे अन्य व्यस्त चौराहों पर भी लागू किया जाएगा।

अन्य शहरों में भी एआई-सिग्नल की दिशा में बढ़ रहे कदम

- अहमदाबाद में 10 प्रमुख चौराहों पर ATCS पायलट शुरू किया गया है। यह सिस्टम कैमरों और सेंसर की मदद से ट्रैफिक की स्थिति देखता है और सिग्नल टाइमिंग को उसी के अनुसार बदलता है। शुरुआती आंकड़ों में ट्रैफिक फ्लो में 18% तक सुधार और ईंधन की बचत देखी गई है।

- विजाग (विशाखापत्तनम) में ₹99 करोड़ की परियोजना ‘प्रोजेक्ट सार्थी’ को मंजूरी मिली है। इसमें 101 चौराहों पर एआई-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, रेड-लाइट उल्लंघन पहचान, ANPR, हेलमेट और ट्रिपल राइडिंग डिटेक्शन, गलत दिशा में ड्राइविंग, और फ्री-फ्लो ट्रैफिक मॉनिटरिंग शामिल हैं। साथ ही, आपातकालीन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था भी होगी।

- लुधियाना में 46 स्थानों पर ITMS लागू हो चुका है, जो नौ प्रकार के ट्रैफिक उल्लंघनों जैसे रेड-लाइट जंप, हेलमेट न पहनना, ओवरस्पीडिंग आदि को पहचान सकता है। इसके साथ ही एकीकृत कमांड सेंटर से आपातकालीन प्रतिक्रिया समय भी घटा है।

- हैदराबाद में भी एआई-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर विचार चल रहा है। एनालॉग और MEIL जैसी कंपनियों ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जिनमें रियल-टाइम सिग्नल समन्वय, सेंसर, रोबोटिक्स और आपातकालीन वाहनों के लिए स्मार्ट कॉरिडोर शामिल हैं।

- दिल्ली पुलिस ने भी एआई-सक्षम ITMS प्रस्तावित किया है, जिसमें पहले चरण में 250 सिग्नल और 271 प्रवर्तन बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहा है।

आपके शहर में क्या हो सकता है?

यदि आपका शहर भी स्मार्ट सिग्नल की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तो यह बदलाव आपके रोजमर्रा के सफर को बेहतर बना सकता है। कम जाम, कम प्रदूषण, तेज यात्रा और नियमों का बेहतर पालन, ये सब संभव हैं। यदि आप ट्रैफिक पुलिस या नगर निगम की वेबसाइट या ऐप पर एआई-सिग्नल, ITMS या ATCS जैसे शब्द देखें, तो समझिए कि आपके शहर में भी यह तकनीक आने वाली है।

अगला कदम क्या हो सकता है?

नागरिकों को चाहिए कि वे इस बदलाव का स्वागत करें और नियमों का पालन करें, जैसे -

  • हेलमेट पहनना, पीयूसी अपडेट रखना।
  • यदि आपके शहर में पायलट चल रहा है, तो आप सोशल मीडिया या स्थानीय न्यूज चैनलों से ट्रायल के परिणाम जान सकते हैं।
  • नगर निगम या पुलिस से संपर्क कर जानकारी प्राप्त करना भी एक तरीका है, जैसे- कौन से चौराहे शामिल हैं, ट्रायल कब तक चलेगा, और पूरे शहर में कब तक लागू होगा।

कहना होगा कि अबस्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल केवल तकनीक नहीं हैं, यह आपके सफर को आसान, तेज और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।