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Fitness Alert : उम्र बढ़ने पर चलने की चाल बढ़ाएं; सेहत में आएगा बड़ा बदलाव

उम्र बढ़ने पर तेज चलने के फायदे जानें! WHO गाइडलाइन्स, HIIT और सही चाल से बुढ़ापे में भी फिट रहें और गिरने का खतरा कम करें।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 11, 2026

FITNESS

फिटनेस का नया फॉर्मूला (AI)

बुढ़ापे में भी फिट, एक्टिव और ऊर्जावान रहना एक आसान और आनंददायक सफर बन सकता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह के शारीरिक और जैविक बदलाव आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी दिनचर्या को सीमित कर लें। सही तरीके से की गई हल्की-फुल्की गतिविधियां, सही दिनचर्या और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया वर्कआउट प्लान न सिर्फ आपकी सेहत को बेहतर बनाता है, बल्कि बढ़ती उम्र में सबसे बड़े खतरे यानी संतुलन बिगड़ने और गिरकर चोटिल होने के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर देता है।

बढ़ती उम्र में क्यों जरूरी है फिटनेस?

उम्र बढ़ने के साथ मानव शरीर में मांसपेशियों का द्रव्यमान (Muscle Mass) घटने लगता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में सार्कोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। इसके अलावा हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम होने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जोड़ों में लचीलापन कम होने और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की प्रतिक्रिया धीमी होने के कारण शरीर का संतुलन प्रभावित होता है।

इन्हीं कारणों से बुजुर्गों में गिरने और फ्रैक्चर होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। हालांकि, आधुनिक खेल विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान यह साबित करते हैं कि सही व्यायाम दिनचर्या के जरिए मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों की मजबूती और शरीर के संतुलन को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

अच्छी सेहत के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बुजुर्गों (65 वर्ष और उससे अधिक आयु) के लिए जारी दिशानिर्देश शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का एक स्पष्ट ढांचा प्रदान करते हैं:

  • मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि: बुजुर्गों को प्रति सप्ताह कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि (जैसे तेज चलना, बागवानी, साइकिल चलाना) करनी चाहिए।
  • तीव्र एरोबिक गतिविधि: जो बुजुर्ग शारीरिक रूप से अधिक सक्षम हैं, वे प्रति सप्ताह 75 से 150 मिनट तीव्र गतिविधि कर सकते हैं।
  • मांसपेशियों की मजबूती (Strength Training): सप्ताह में कम से कम 2 या अधिक दिन शरीर के सभी प्रमुख मांसपेशी समूहों को मजबूत करने वाले व्यायाम करने की सलाह दी जाती है।
  • संतुलन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: गिरने के खतरे को कम करने के लिए सप्ताह में 3 या अधिक दिन बहु-घटकीय शारीरिक गतिविधियों (Multi-component Physical Activity) पर जोर देना चाहिए, जो संतुलन और कार्यात्मक क्षमता को बढ़ाती हैं।
  • विशेष नोट: यदि कोई व्यक्ति शुरुआत में इन लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहा है, तो थोड़ी सी भी गतिविधि बिल्कुल न करने से कहीं बेहतर है। धीरे-धीरे समय और तीव्रता बढ़ाने से भी शरीर को बड़ा लाभ मिलता है।

चलने की चाल (Cadence) तेज करें और बढ़ाएं अपनी क्षमता

फिट रहने का सबसे आसान और सुलभ तरीका है चलना। लेकिन हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि केवल चलना ही काफी नहीं है, बल्कि चलने की गति और चाल की लय (Cadence) भी बहुत मायने रखती है।

100 कदम प्रति मिनट का नियम: शिकागो विश्वविद्यालय के एक शोध में पाया गया कि यदि बुजुर्ग अपनी सामान्य चलने की चाल में प्रति मिनट लगभग 14 कदमों की वृद्धि करते हुए इसे 100 कदम प्रति मिनट तक ले जाते हैं, तो उनकी एरोबिक क्षमता में अभूतपूर्व सुधार होता है।

सहनशक्ति में वृद्धि: तेज गति से चलने से हृदय और फेफड़ों की कार्यप्रणाली मजबूत होती है, जिससे व्यक्ति बिना थके लंबी दूरी तय कर पाता है।

स्मार्ट ट्रैकिंग: आजकल स्मार्टफोन और फिटनेस बैंड की मदद से आप आसानी से अपने कदमों की संख्या और चलने की चाल को मॉनिटर कर सकते हैं।

बुजुर्गों के लिए हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) का जादू

अक्सर माना जाता है कि हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) केवल युवाओं या एथलीटों के लिए होती है, लेकिन प्रसिद्ध नॉर्वेजियन "Generation 100" अध्ययन ने इस धारणा को बदल दिया है।

  • अध्ययन के निष्कर्ष: 70 से 77 वर्ष की आयु के 1,500 से अधिक बुजुर्गों पर 5 वर्षों तक किए गए इस अध्ययन में देखा गया कि जो बुजुर्ग सप्ताह में दो बार HIIT वर्कआउट कर रहे थे, उनकी कार्डियो-रेस्पिरेटरी फिटनेस (हृदय-फेफड़ों की क्षमता) और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सबसे अधिक सुधार हुआ।
  • बुजुर्गों के लिए अनुकूलित HIIT: बुजुर्गों के लिए HIIT का मतलब बहुत कठिन वर्कआउट नहीं है। इसका सीधा सा अर्थ है—गति में बदलाव। उदाहरण के लिए, 3-4 मिनट सामान्य गति से चलने के बाद 1-2 मिनट तेज चाल में चलना, और फिर सामान्य गति पर लौट आना। यह तरीका दिल पर अत्यधिक दबाव डाले बिना बेहतरीन कार्डियो लाभ देता है।

वजन उठाना और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग: सुरक्षित और असरदार

मांसपेशियों के नुकसान को रोकने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) ट्रेनिंग सबसे प्रभावी जरिया है।

रेजिस्टेंस ट्रेनिंग की मुख्य विशेषताएं:

  • वार्म-अप: किसी भी वर्कआउट से पहले 5–10 मिनट का हल्का वार्म-अप (जैसे हाथों-पैर की स्ट्रेचिंग) जरूरी है।
  • वर्कआउट संरचना: सप्ताह में 3 से 4 दिन, 45-60 मिनट का सत्र पर्याप्त होता है। इसमें 5 से 7 अलग-अलग व्यायाम शामिल किए जा सकते हैं।
  • सेट और रेप्स: प्रत्येक व्यायाम के 3 सेट और 12 दोहराव (Reps) करने की सलाह दी जाती है।
  • उपकरण: रेजिस्टेंस बैंड, हल्के डम्बल, या स्वयं के शरीर के वजन (Bodyweight exercises जैसे चेयर स्क्वैट्स) का उपयोग किया जा सकता है।
  • सुरक्षा एवं फॉर्म: वजन उठाने के दौरान सही फॉर्म और तकनीक का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि जोड़ों पर गलत दबाव न पड़े।

उम्र और क्षमता के हिसाब से सही व्यायाम का चुनाव

हर व्यक्ति का शरीर और उसकी क्षमता अलग होती है। इसलिए व्यायाम का चुनाव व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

  • शुरुआती स्तर: यदि आप लंबे समय से निष्क्रिय रहे हैं, तो शुरुआत हल्की गतिविधियों से करें जैसे घर के हल्के काम, बागवानी, पार्क में टहलना या हल्की स्ट्रेचिंग।
  • मध्यम स्तर: शरीर के अभ्यस्त होने पर तेज चलना, योग, वाटर एरोबिक्स और रेजिस्टेंस बैंड व्यायाम शामिल करें।
  • विशेष सावधानियां: यदि आपको जोड़ों में दर्द, आर्थराइटिस, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या हृदय संबंधी कोई समस्या है, तो किसी भी नए व्यायाम सत्र की शुरुआत करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लें।

आपकी फिटनेस यात्रा का अगला कदम

यदि आपने अभी तक व्यायाम शुरू नहीं किया है, तो घबराने की कोई बात नहीं है। फिटनेस की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है।

  • चिकित्सकीय परामर्श: सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलकर अपनी शारीरिक स्थिति की जांच कराएं।
  • छोटी शुरुआत: पहले दिन से ही बहुत ज्यादा करने की कोशिश न करें। प्रतिदिन 10-15 मिनट के टहलने से शुरुआत करें।
  • निरंतरता: धीरे-धीरे समय और चाल बढ़ाएं। हफ्ते में 2 दिन हल्के स्ट्रेंथ व्यायाम जोड़ें।
  • ट्रैकिंग: अपनी प्रगति को डायरी या मोबाइल ऐप में ट्रैक करें।
  • उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ कमजोर होना अनिवार्य नहीं है। सही खान-पान, सकारात्मक सोच और नियमित शारीरिक गतिविधियों को अपनाकर आप अपने बुढ़ापे को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और आनंदमय बना सकते हैं।

अस्वीकरण:यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर या चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी दिनचर्या में कोई भी नया व्यायाम शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।