5 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मकान किराए पर देने से पहले मकान मालिक को क्या-क्या करना चाहिए?

Rent Agreement : मकान किराए पर देने से पहले क्या करें? जानिए पुलिस वेरिफिकेशन, रेंट एग्रीमेंट, स्टांप ड्यूटी, किराए की आय पर टैक्स नियम और कानूनी सुरक्षा की पूरी गाइड।
2 min read
Google source verification
landlord checklist before renting property India

landlord checklist before renting property India

भारत में मकान किराए पर देना आम बात है, लेकिन कई बार छोटी-सी लापरवाही बड़े कानूनी, वित्तीय या सुरक्षा संबंधी विवाद का कारण बन सकती है। किरायेदार को घर देने से पहले कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर लेना मकान मालिक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस वेरिफिकेशन, रेंट एग्रीमेंट, स्टांप ड्यूटी और टैक्स नियमों की जानकारी आपको भविष्य की परेशानियों से बचा सकती है।

सबसे पहले करें किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन

किसी भी किरायेदार को घर देने से पहले उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जांच कराना जरूरी है। कई राज्यों और शहरों में पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य माना जाता है। इसके लिए किरायेदार का आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य पहचान पत्र की कॉपी लेकर स्थानीय पुलिस थाने या ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है।

पुलिस वेरिफिकेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किरायेदार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। कई मामलों में पुलिस वेरिफिकेशन न कराने पर मकान मालिक पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

रेंट एग्रीमेंट जरूर बनवाएं

किराए का लेन-देन केवल मौखिक सहमति पर नहीं होना चाहिए। एक लिखित रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है।

रेंट एग्रीमेंट में आमतौर पर ये बातें शामिल होती हैं:

  • मासिक किराया
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट
  • किराए की अवधि
  • बिजली-पानी का भुगतान
  • मकान खाली करने की शर्तें
  • किराया बढ़ाने के नियम
  • रखरखाव की जिम्मेदारी

बिना लिखित एग्रीमेंट के विवाद होने पर कानूनी स्थिति कमजोर हो सकती है।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन के नियम समझें

रेंट एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित की जाती है और यह राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर:

  • 11 महीने तक के एग्रीमेंट पर भी स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है।
  • कुछ राज्यों में रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक होता है, जबकि लंबी अवधि के एग्रीमेंट में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है।
  • ई-स्टांप या नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट बनाया जा सकता है।
  • रजिस्टर किया गया एग्रीमेंट अदालत में अधिक मजबूत कानूनी दस्तावेज माना जाता है।
  • किराए की आय पर टैक्स भी देना पड़ सकता है

कई मकान मालिक यह मान लेते हैं कि किराए की पूरी रकम उनकी आय है, लेकिन आयकर नियम अलग तरीके से काम करते हैं।किराए से होने वाली आय को 'Income from House Property' के तहत दिखाया जाता है।

टैक्स गणना में:

  • नगर निगम कर (Municipal Tax) की कटौती मिल सकती है।
  • नेट वार्षिक मूल्य पर 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है।
  • होम लोन के ब्याज पर भी कुछ मामलों में छूट मिल सकती है।
  • यदि आपकी कुल आय टैक्स स्लैब में आती है तो किराए की आय को ITR में दिखाना जरूरी है।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट और भुगतान का रिकॉर्ड रखें

किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट का भुगतान बैंक ट्रांसफर, UPI या चेक के माध्यम से लेना बेहतर माना जाता है। इससे भविष्य में भुगतान संबंधी विवाद होने पर रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि, वापसी की शर्तें और कटौती के नियम एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से लिखे होने चाहिए।

सोसायटी और स्थानीय नियम भी जांचें

यदि मकान किसी अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसायटी में है, तो वहां किरायेदार के प्रवेश के लिए अलग नियम हो सकते हैं। कई सोसायटियां KYC, पुलिस वेरिफिकेशन और प्रवेश फॉर्म अनिवार्य करती हैं। इन नियमों का पालन करने से बाद में सोसायटी से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

मकान किराए पर देने से पहले: जरूरी चेकलिस्ट

🏠 जरूरी काम📌 क्यों जरूरी है?
👮 पुलिस वेरिफिकेशनसुरक्षा और कानूनी अनुपालन
📝 रेंट एग्रीमेंटविवाद से बचाव और कानूनी सुरक्षा
📑 स्टांप ड्यूटीदस्तावेज को वैध बनाना
⚖️ रजिस्ट्रेशनमजबूत कानूनी प्रमाण
💰 टैक्स नियमआयकर अनुपालन
🏦 भुगतान रिकॉर्डवित्तीय पारदर्शिता
🏢 सोसायटी अनुमतिस्थानीय नियमों का पालन