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World Tiger day: बाघ संरक्षण में भारत पूरी दुनिया में अव्वल, फिर भी जंगल से बाहर भटक रहे 1200 टाइगर

जंगलों में खाद्य श्रंखला (Food Chain) को बनाए रखने एवं पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण (Ecosystem conservation) में बाघ (Tiger) अहम भूमिका निभाते हैं। बाघों के अस्तित्व की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक स्तर पर उनके संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं, भारत एवं वैश्विक स्तर पर बाघों के संरक्षण की क्या स्थिति है?
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भारत

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Vinay Shakya

Jul 29, 2026

International Tiger day

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (फोटो- AI)

Tiger Conservation: हर साल 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत नवंबर 2010 में आयोजित 'सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट' से हुई थी। इसका उद्देश्य टाइगरों को संरक्षित करके उनकी आबादी को बढ़ाना है, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल असर न पड़े। आज का दिन बाघ संरक्षण की दृष्टि से भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों को दर्शाता है। मौजूदा समय में भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जंगली बाघों की आबादी है, जो वैश्विक स्तर पर सभी जंगली बाघों का लगभग 70% है।

भारत की यह सफलता दशकों के निरंतर नीतिगत समर्थन, वैज्ञानिक प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को दर्शाती है, जिससे भारत बाघ संरक्षण में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित हुआ है। देश की बाघ संरक्षण नीति काफी सफल साबित हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोजेक्ट टाइगर और बाघ संरक्षण योजनाएं मिलकर बाघों के प्राकृतिक आवास के लिए एक मजबूत और विज्ञान आधारित प्रशासनिक ढांचा तैयार करते हैं।

जंगलों से बाहर घूम रहे 1200 टाइगर

भारत ने वर्ष 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट शुरू करके दुनिया को सफल मॉडल दिया। मौजूदा समय में देश के 18 राज्यों 58 टाइगर रिजर्व के संरक्षित क्षेत्रों में आवास कर रहे करीब 4000 टाइगर में से 30 प्रतिशत यानी 1200 टाइगर बाहर विचरण कर रहे हैं। अब सवाल है कि देश में सफल मॉडल होते हुए भी 1200 टाइगर जंगलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर क्यों हुए ? बाहर विचरण कर रहे इन टाइगर्स ने कई चुनौतियां खड़ी कर दी है।

जानकारों का कहना है कि यदि टाइगर सुरक्षित है तो समझिए जंगल में पूरा पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है। टाइगर बचे रहे तो जंगल में अनुशासन, पानी के स्रोतों तथा जैव विविधता बनी रहेगी। दुनिया के सामने खुद को टाइगर मॉडल पेश करने के बावजूद भारत में पिछले कुछ सालों में टाइगर की मौतें हो रही हैं। जानकारों का कहना है कि देश के लिए असली चुनौती टाइगरों को सुरक्षित जंगल, पर्याप्त शिकार, एक-दूसरे से जुड़े हुए कॉरिडोर और इंसानों के साथ संतुलित सह-अस्तित्व उपलब्ध कराने की है।

जंगल क्यों छोड़ रहे हैं टाइगर?

  • टाइगर रिजर्व में क्षमता से अधिक संख्या होना।
  • जंगलों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर का टूटना।
  • सड़क, रेलवे, खनन और शहरी विस्तार से आवास का विखंडन।
  • शिकार योग्य वन्यजीवों की कमी।
  • नए क्षेत्र की तलाश में युवा बाघों का पलायन।

वैश्विक स्तर पर टाइगरों की आबादी

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2010 में, विश्व स्तर पर लगभग 3,200 जंगली बाघ होने का अनुमान था। साल 2022 तक बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी से यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 4,500 हो गया। हालिया वैश्विक अनुमानों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 5,711 जंगली बाघ हैं। टाइगरों की संख्या में साल 2010 के बाद से लगभग 78% की वृद्धि हुई है। भारत की बाघ संरक्षण की कोशिशें वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने के मामले में दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई हैं।

साल 2006 के बाद से देश में वैज्ञानिक तरीके से गिनी गई बाघों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है। अखिल भारतीय बाघ अनुमान- 2022 के सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है। 2022 में अखिल भारतीय बाघ अनुमान का सर्वेक्षण देश में 20 राज्यों के 6.41 लाख किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले क्षेत्र में किया गया था। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण में से एक है।

टाइगरों की मौत और शिकार की चुनौती

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के डेटा के अनुसार, साल 2025 में भारत में 157 और 2026 में 111 बाघों की मौत दर्ज हुई। साल 2024 में 126 बाघों की मौत हुई थी। पिछले 5 वर्षों में लगभग 51% बाघों की मौत रिजर्व क्षेत्र से बाहर हुई हैं। मौत का कारणों में टाइगरों की आपसी लड़ाई, विद्युत आघात, सड़क दुर्घटना, जहर और शिकार जैसे मुख्य बिंदु शामिल हैं। 2025 में 31 शावक भी मारे गए।

टाइगर क्यों जरूरी हैं?

जंगल के संतुलन रक्षक : जंगल में टाइगर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह चीतल, सांभर, जंगली सूअर और भैंस जैसे जानवरों का शिकार करके उनकी संख्या नियंत्रित रखते हैं। इससे जंगल की वनस्पति और इकोसिस्टम संतुलित बना रहता है।

जैव विविधता की रक्षा : जहां बाघ सुरक्षित रहते हैं, वहां हिरण, हाथी, पक्षी, पेड़-पौधे और अन्य वन्यजीव भी बेहतर तरीके से संरक्षित रहते हैं।

पानी के स्रोत बचाते हैं : बाघों के संरक्षण के लिए बड़े वन क्षेत्रों की रक्षा की जाती है। यही जंगल नदियों, झरनों और भूजल के प्रमुख स्रोत हैं।

जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद : स्वस्थ जंगल अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। बाघों का संरक्षण अप्रत्यक्ष रूप से कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा : टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटक स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करते हैं। उदाहरण के तौर पर राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व, पर्यटकों को आकर्षित करता है। रणथंभौर क्षेत्र में 400 करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था विकसित हुई है और 2 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत : किसी जंगल में बाघों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और संतुलित है।

बाघ संरक्षण की स्थिति

बाघ संरक्षण के लिए भारत, लंबे समय से अभियान चला रहा है। भारत सरकार की योजना ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ का मकसद बाघों की आबादी को उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षित रखना है। यह संरक्षण के प्रयासों के लिए बाघ वाले राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की रिपोर्ट (2023) के अनुसार, प्रोजेक्ट टाइगर ने 18 बाघ-रेंज वाले राज्यों में 58 बाघ अभ्यारण्य का एक नेटवर्क स्थापित किया है। ये अभ्यारण्य लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.56% है।

मौजूद समय में 'प्रोजेक्ट टाइगर' भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक आधारशिला बना हुआ है। NTCA, प्रोजेक्ट टाइगर और उससे जुड़ी संरक्षण पहलों के कार्यान्वयन की निगरानी करता है। NTCA बाघ-रेंज वाले राज्यों को वैज्ञानिक, तकनीकी और वित्तीय मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह 'बाघ संरक्षण योजनाओं' को मंजूरी देता है और अभ्यारण्य प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी करता है। यह प्राधिकरण आवधिक आकलनों के माध्यम से बाघ अभ्यारण्य के प्रबंधन की निगरानी भी करता है।

बाघ संरक्षण में भारत का वैश्विक नेतृत्व

भारत वैश्विक स्तर पर इंटरनेशनल बिग कैट (International Big Cat Alliance) अलायंस का नेतृत्व करता है। इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस बिल्ली प्रजातियों में बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता आदि के संरक्षण के लिए बनाया गया वैश्विक गठबंधन है। इस संगठन की स्थापना 2024 में हुई और इसका सचिवालय भारत में है। यह संगठन 95 साझेदार देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग, अनुसंधान और आवास संरक्षण बढ़ाने जैसे विषयों पर सहयोग करता है।

GTF का नेतृत्व : यह संगठन दुनिया का एकमात्र अंतर-सरकारी संगठन है, जो पूरी तरह से बाघों के संरक्षण के लिए समर्पित है। इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह संगठन 13 देश- बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम को एक मंच पर लाता है। यह फोरम बाघों, उनके शिकार और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए एक साझा तरीका अपनाता है। यह सदस्य देशों में बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर संरक्षण (लैंडस्केप-स्केल कंजर्वेशन), क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और तकनीकी इनोवेशन में मदद करता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त वन अधिकारी आर. के. दीक्षित का कहना है कि बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में हैं। पारिस्थितिकी तंत्र और बाघ समेत दूसरे वन्यजीव एक-दूसरे के पूरक हैं। बाघों का संरक्षण करेंगे तो जंगल बचाना होगा। यदि जंगल बचाएंगे तो बाघों को सुरक्षित रहवास स्थल मिलेगा। राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के पूर्व क्षेत्र निदेशक आरएस शेखावत कहते हैं कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने, जंगलों को बचाने और पानी के स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए टाइगर जरूरी हैं। राजस्थान में राजगढ़, दौसा, जयपुर के जंगल को सरिस्का से जोड़ा जाना चाहिए और बफर एरिया बढ़ाया जाना चाहिए।