
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
कृषि उद्यमिता अब केवल बड़े किसानों या पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही है। यह युवाओं के लिए नए रोजगार, स्वरोजगार और आय के अवसर खोल रही है। हाल ही में केंद्र और राज्य स्तर पर कई पहलें शुरू की गई हैं, जो इस क्षेत्र में युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ने की दिशा दे रही हैं।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में ‘प्रगति’ नामक राष्ट्रीय पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य 20,000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाना है। इस योजना के तहत उन्हें गांव स्तर पर सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीन सेवाएं, वित्तीय संपर्क और बाजार से जोड़ने जैसे संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय और उत्पादकता में सुधार हो सकेगा। यह पहल युवाओं को कृषि क्षेत्र में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर ने पीएम-आरकेवीवाई नवाचार एवं कृषि उद्यमिता कार्यक्रम (कोहोर्ट 8.0) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 21 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इसमें हरियाणा के नवाचारी किसान, विद्यार्थी, शोधकर्ता, स्टार्टअप और उद्यमी आवेदन कर सकते हैं। चयनित प्रतिभागियों को एक माह का विशेष प्रशिक्षण मिलेगा और 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता अनुदान के रूप में दी जाएगी। यह पहल युवाओं को कृषि संबंधी समस्याओं का व्यावसायिक समाधान खोजने और उसे व्यवसाय में बदलने का अवसर देती है।
झारखंड में स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले चार महीनों में तेजी आई है। पहले जहां एक प्रस्ताव प्रति माह आता था, अब तीन नए उद्यम प्रस्ताव हर महीने आ रहे हैं। इनमें कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, आदिवासी परिधान और वेलनेस उत्पाद शामिल हैं। नीति आयोग से जुड़े विशेषज्ञ संजय सहाय ने इसे युवाओं की सकारात्मक पहल बताया, और एक स्टार्टअप को सहजन से बने वेल्यू-एडेड उत्पाद के लिए विदेश से ऑर्डर भी मिले हैं। झारखंड इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (जिडको) और चैंबर ऑफ कॉमर्स निवेश, मेंटरशिप और बाजार तक पहुंच में सहयोग कर रहे हैं।
झारखंड स्टार्टअप नीति 2023 के तहत राज्य ने अगले 5 वर्षों में 1,000 नए स्टार्टअप्स बनाने, 1,00,000 वर्ग फुट इनक्यूबेशन स्पेस विकसित करने और 2028 तक शीर्ष दस स्टार्टअप राज्यों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। इसमें विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और महिला उद्यमियों को शामिल करने पर जोर है। इसके अलावा, राज्य की फूड एंड फीड प्रोसेसिंग पॉलिसी 2024 में आदिवासी विकास, महिला उद्यमिता, वन उत्पादों के प्रसंस्करण और मोबाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रीकूलिंग व रीफर ट्रकों पर ध्यान दिया गया है।
केंद्रीय स्तर पर, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY), PMFME और PLISFPI जैसी योजनाएं हैं। झारखंड में अब तक PMKSY के तहत एक परियोजना को 0.5 करोड़ रुपये की सब्सिडी, PMFME के तहत 4,665 माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज को 94.82 करोड़ रुपये की सब्सिडी और PLISFPI के तहत दो परियोजनाओं को 11.76 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत हुआ है। यह दर्शाता है कि कृषि-उद्यमिता को वित्तीय और संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है।
Startup India रजिस्टर के अनुसार, झारखंड में कुल 5,045 स्टार्टअप्स दर्ज हैं, जिनमें से 556 को किसी न किसी रूप में फंडिंग मिली है। कृषि क्षेत्र में 5.7% (289) और फूड एवं बेवरेज सेक्टर में 5.6% (284) स्टार्टअप्स हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में उद्यमिता का विस्तार हो रहा है।
केंद्र एवं राज्य सरकार की इन पहलों से स्पष्ट है कि कृषि उद्यमिता युवाओं के लिए केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। ‘प्रगति’ जैसी पहलें उन्हें सीधे किसानों से जोड़ती हैं, जबकि एचएयू और झारखंड जैसी संस्थाएं उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार तक पहुंच प्रदान करती हैं। साथ ही, नीति और वित्तीय योजनाएं उन्हें टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने में सहायता कर रही हैं।
युवा किसान, कृषि छात्र और उद्यमी इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए। सरकारी पहल ‘प्रगति’ के तहत स्थानीय कृषि विभाग या पंचायत से जानकारी प्राप्त करें। हरियाणा में कोहोर्ट 8.0 जैसे कार्यक्रमों के लिए आवेदन करें। इसके अलावा झारखंड में स्टार्टअप प्रस्ताव तैयार करें और जिडको या चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क करें। युवा उद्यमी PMKSY, PMFME जैसी योजनाओं में आवेदन करके फंडिंग और समर्थन प्राप्त कर सकते हैं।
Updated on:
20 Oct 2026 09:25 pm
Published on:
20 Oct 2026 09:25 pm
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