
राजस्थान के अलवर शहर के लोग प्रतिदिन लगभग 1 लाख की संख्या में कचौरी, समोसे, आलूबड़े या अन्य नमकीन चट करते हैं।

अलवर की कचौरियों का स्वाद ही कुछ ऐसा है कि हर कोई इसका दीवाना हो चुका है। शहर में ही नहीं अलग अलग स्थानों से लोग केवल अलवर की कचौरियों का स्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।

इसे खाने के शौकीन ऐसे हैं कि दिन में एक बार जब तक इसका स्वाद चख ना ले उनका कुछ खाने में मन ही नहीं करता हेै।

शहर के चौराहों पर सुबह सुबह बनने वाली गर्मागर्म कचौरियों की खुशबू ऐसी होती है कि चलते हुए लोगों के कदम रूक जाते हैं और कचौरी खाए बिना आगे नहीं बढ़ते।

अलवर शहर में होपसर्कस, पुलिस कंट्रोल रूम, अशोका टाकीज, काशीराम का चौराहा, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, नंगली सर्किल, भगत सिंह, जेल का चौराहा शायद ही शहर की कोई जगह हो जहां हमें कचौरी की ठेलियां दिखाई ना दे।

शहर के कचौरी विक्रेताओं ने बताया कि एक ही दिन में करीब 1 लाख से ज्यादा कचौरी, समोसा, ब्रेड पकोड़े, मिर्च बड़ा बिक जाते हैं।

एक (कचौरी, समोसा, ब्रेड पकोड़े, मिर्च बड़ा) की कीमत लगभग 15 से 20 रुपए होती है। अगर एक कचौरी की कीमत 15 रुपए भी मानें तो अलवर वासी एक ही दिन में करीब 15 लाख रुपए की कचौरियां खा जाते हैं।

यहां की कचौरी बहुत ही स्वादिष्ट होती है। कचौरी और चटनी के साथ और हींग का पानी भी दिया जाता है। इसके अलावा शहर में दही, कढ़ी, आलू की सब्जी व लहसुन की चटनी के साथ भी कचौरी खाई जाती है।

इसके अलावा यहां की प्याज की कचौरी भी खास है।