11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

PHOTO STORY : आसमान में यूं अठखेलियां करते है मेहमान पक्षी कुरजां

फलोदी. चीन, मंगोलिया, कजाकिस्तान, रूस आदि देशों में बफबारी के कारण भोजन की विकट परिस्थितियों के चलते वहां रहने वाले डेमोसाइल क्रैन या कुरजां पक्षी प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर निकल जाते है।
2 min read
Google source verification
पक्षी रात्रि विश्राम के लिए पास के नमक उत्पादन क्षेत्र में जाते है तथा सूर्याेदय के साथ कुरजां खीचन गांव में आ जाती है। इससे गांव कुरजां की कुर्र-कुर्र आवाज से गूंज उठता है। पर्यटक कुरजां की अठखेलियों को निहारने के लिए काफी उत्सुक दिखते है। कुरजां के समूह आसमान में वी-आकृति में उड़ते है। यह नजारा रोमांचित कर देने वाला होता है।

पक्षी रात्रि विश्राम के लिए पास के नमक उत्पादन क्षेत्र में जाते है तथा सूर्याेदय के साथ कुरजां खीचन गांव में आ जाती है। इससे गांव कुरजां की कुर्र-कुर्र आवाज से गूंज उठता है। पर्यटक कुरजां की अठखेलियों को निहारने के लिए काफी उत्सुक दिखते है। कुरजां के समूह आसमान में वी-आकृति में उड़ते है। यह नजारा रोमांचित कर देने वाला होता है।

चीन, मंगोलिया, कजाकिस्तान, रूस आदि देशों में बफबारी के कारण भोजन की विकट परिस्थितियों के चलते वहां रहने वाले डेमोसाइल क्रैन या कुरजां पक्षी प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर निकल जाते है।

चीन, मंगोलिया, कजाकिस्तान, रूस आदि देशों में बफबारी के कारण भोजन की विकट परिस्थितियों के चलते वहां रहने वाले डेमोसाइल क्रैन या कुरजां पक्षी प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर निकल जाते है।

जोधपुर जिले के फलोदी तहसील के खीचन गांव में प्रतिवर्ष करीब पच्चीस हजार कुरजां पक्षी शीतकालीन प्रवास पर आते है। यहां करीब छ: माह तक इन पक्षियों का प्रवास होता है।  कुरजां सितम्बर माह में यहां आती है तथा मार्च में ग्रीष्म ऋतु की दस्तक के साथ ही वतन वापसी कर लेती है। प्रवास के दौरान पक्षी सुबह पक्षी चुग्गाघर में तथा दोपहर में गांव के तालाबों पर स्वच्छंद विचरण करते नजर आते है।

जोधपुर जिले के फलोदी तहसील के खीचन गांव में प्रतिवर्ष करीब पच्चीस हजार कुरजां पक्षी शीतकालीन प्रवास पर आते है। यहां करीब छ: माह तक इन पक्षियों का प्रवास होता है। कुरजां सितम्बर माह में यहां आती है तथा मार्च में ग्रीष्म ऋतु की दस्तक के साथ ही वतन वापसी कर लेती है। प्रवास के दौरान पक्षी सुबह पक्षी चुग्गाघर में तथा दोपहर में गांव के तालाबों पर स्वच्छंद विचरण करते नजर आते है।