12 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।

3 min read
Google source verification

सतना

image

Sajal Gupta

Aug 11, 2018

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।

तालाब ने की नगर निगम से पुकार मेरी दुर्दशा दूर करो

सतना. मै कोई गंदा नाला नही, शहर के ह्दय स्थल ङ्क्षस्थत जगतदेव तालाब हूं। मेरे घाट पर स्वंय देवों के देव महादेव का वास है। इसके बाजवूद भक्तों ने मेरी ऐसी दुर्गति की है कि मेरा जल आचमन लायक नही बचा। नगर निगम प्रशासन मेरे सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपय खर्च कर चुका है। मेरे कायाकल्प की कई योजनाएं बनी, लेकिन वह फाइलों से बाहर नही निकल पाई। मेरी कोख में हर दिन सैंकड़ों किलो फूल-माला, पूजन सामग्री एवं पालीथिन डाली जा रही है। शहर का गंदा पानी मुझमें समाहित किया जा रहा है।