पीलीभीत। सत्य, अहिंसा के हथियार से ब्रिटिश हुकूमत को झुकाने वाले हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक भी प्रतिमा नहीं है। उनके नाम पर पीलीभीत में गांधी स्टेडियम, गांधी प्रेक्षागृह और सभागार आदि बने हुए हैं। इतिहास बताता है कि बापू पीलीभीत में एक बार 1932 में आए थे। इसके बाद भी जनपद का दुर्भाग्य ही है कि आजादी के मसीहा बापू की यहां कोई प्रतिमा नहीं है। पीलीभीत का एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता बापू की प्रतिमा लगवाने के लिए सात वर्ष से संघर्ष कर रहा है। उसके सभी प्रार्थनापत्र सरकारी फाइलों में धूल खा रहे हैं। हालांकि इस सामाजिक कार्यकर्ता को पत्राचार द्वारा कई जवाब तो मिले, लेकिन अभी तक प्रतिमा लगवाने के लिए किसी भी सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पत्र पर नहीं हुआ कुछ भी
पीलीभीत के युवा सामाजिक कार्यकर्ता कलीम अतहर खान ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व गृहमंत्री पी0 चिदम्बरम के नाम पत्र लिखा था। पहला पत्र लिखा गया था 9 दिसम्बर 2011 को और फिर शुरू हुआ खेल। गेंद इधर से उधर फेंके जाने का। इसका जवाब 27 दिसम्बर 2011 को प्रधानमंत्री कार्यालय से आया कि पत्र मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को भेज दिया गया। वक्त था प्रदेश में बसपा शासनकाल का। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश ने इस पत्र को भेज दिया लोक शिकायत अनुभाग-1 को और तारीख थी 12 जनवरी 2012। इसके बाद अचानक एक दिन 5 जून 2012 को एक पत्र आता है और यह पत्र नगर विकास के उप सचिव ने संस्कृति विभाग को लिखा और गेंद उनके पाले में फेंक दी।
सपा सरकार ने नहीं सुनी
दिन बदले सरकार बदल गई और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आ गयी। मगर यह फाइल जस की तस पड़ी रही। इस मुद्दे को पुनः गर्म करते हुए इस बार श्री खान ने एक पत्र मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को 1 नवम्बर 2012 को लिखा। पुनः मांग की, लेकिन बापू की फाइल 7 सालों से एक विभाग से दूसरे विभाग की खाक छान रही है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश सरकार पीलीभीत शहर में बापू की प्रतिमा लगवाने के लिये कोई दम दिखाएगी या फिर पूर्व की तरह यह फाइल धूल ही खाती रहेगी।
भाजपा सरकार से उम्मीद
श्री खान ने दोबारा सपा सरकार बनने के बाद भी अपनी कार्यवाही चालू रखी लेकिन 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी जनपद मुख्यालय पर गांधी जी की कोई भी प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है। श्री खान को भाजपा सरकार से उम्मीद है कि शायद उनकी यह मांग पूरी हो सके।
आज़ादी से आजतक किसी जनप्रतिनिधि ने भी नहीं किया प्रयास
आज़ादी के बाद से पीलीभीत को तमाम सांसद व मंत्री केन्द्र व प्रदेश सरकार में मिले लेकिन दुर्भाग्यवश बापू की प्रतिमा लगवाने का प्रयास तो छोडिये उन्होने इसके बारे में कभी सोचा भी नहीं। बीते 25 सालों से यहॉ मेनका गांधी व वरूण गांधी सांसद रहे इस बीच मेनका गांधी कई बार मंत्री भी रही इसके अलावा प्रदेश सरकार में धीरेन्द्र सहाय, तेज बहादुर गंगवा, डा0 विनोद तिवारी, रामसरन वर्मा, अनीस अहमद खॉ, रियाज अहमद व हेमराज वर्मा भी प्रदेश सरकार में मंत्री रहे लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने बापू की प्रतिमा लगवाने के बारे में सोचा ही नहीं।