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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता पैनल ने सौंपी स्टेटस रिपोर्ट

Ayodhya Dispute Case: सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को बनाया था मध्‍यस्‍थता पैनल मध्‍यस्‍थता पैनल से सकारात्‍मक परिणाम आने की उम्‍मीद कम दो अगस्‍त को राम मंदिर मामले में सुनवाई

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नई दिल्‍ली। अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता पैनल ने स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें हर एक पक्षकार के रुख और दलीलों का ब्यौरा है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत फाइनल रिपोर्ट देखने के बाद रोजाना सुनवाई की जानी है या नहीं इस पर फैसला करेगा।

बता दें कि राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को मध्यस्थता समिति को हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सहमति बनाने के लिए 31 जुलाई तक वार्ता जारी रखने का आदेश दिया था।

शीर्ष अदालत ने मध्यस्थों से अदालत की निगरानी में गोपनीय रूप से प्रक्रिया जारी रखने का अनुरोध किया था।

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8 मार्च को हुआ था मध्‍यस्‍थता पैनल का गठन

मध्‍यस्‍थता पैनल ने 7 मई को एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट मे सामने अंतरिम रिपोर्ट पेश की थी। उसके बाद समिति के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकालने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया था।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को बड़ा कदम उठाते हुए विवादित भूमि के सभी पक्षों से बात करने के लिए तीन सदस्यों वाली मध्यस्थता समिति का गठन कर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी।

इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई खलीफुल्ला बनाए गए थे। दो अन्य सदस्‍यों में आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल हैं।

इससे पहले अदालत ने अयोध्या ( ayodhya dispute case ) की विवादित भूमि के मामले की सुनवाई प्रतिदिन शुरू करने के लिए 25 जुलाई की तारीख तय की थी।

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सकारात्मकर परिणाम की उम्‍मीद कम

इस मामले में एक याचिकाकर्ता ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। इसलिए कोर्ट को जल्द फैसले के लिए रोज सुनवाई पर विचार करना चाहिए।

इस पर कोर्ट ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल की स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद ही तय करेंगे कि अयोध्या ( ayodhya dispute case ) मामले की सुनवाई रोजाना की जाए या नहीं।

अयोध्या विवाद में पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की याचिका और जल्द सुनवाई का निर्मोही अखाड़ा ने भी समर्थन किया था। निर्मोही अखाड़ा ने कहा था कि मध्यस्थता प्रकिया सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। इससे पहले अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में था।