लगभग 30 साल पहले 25 जुलाई, 1991 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ही के वीरास्वामी केस (K Veeraswami Case) में किसी भी जांच एजेंसी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) या हाईकोर्ट (High Court) में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ साक्ष्य सीजेआई (CJI) को दिखाए बिना जांच शुरू करने के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करने की अनुमति नहीं दी थी। हाईकोर्ट (High Court) में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ 1991 से पहले किसी भी एजेंसी ने किसी भी मामले में जांच नहीं की थी। तब से यह पहला मामला है, जब सीजेआई (CJI Ranjan Gogoi) ने एक जांच एजेंसी को एक सिटिंग जज के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की अनुमति दी है। सीबीआई (CBI) जल्द ही जस्टिस शुक्ला (Justice Shukla) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगी। जस्टिस शुक्ला (Judge SN Shukla) भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत गिरफ्तार करने की भी पूरी संभावना है।