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…तो राजनीति छोड़ बिजनेस करना चाहते थे नीतीश कुमार

पत्रकार ने अपनी किताब में नीतीश के दोस्त के हवाले से लिखा, एक वक्त पर हार मान गए थे नीतीश

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Puneet Parashar

Nov 08, 2015

bihar election ruled or misruled

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पटना। एक किताब में बताया गया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक वक्त पर बिजनेस शुरू करने की भी योजना बनाई थी। उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया था जब उन्होंने पॉलिटिक्स छोड़ने का मन बना लिया था। पत्रकार संतोष सिंह की किताब "रूल्ड ऑर मिसरूल्ड" में लिखा गया है कि 1977 और 1980 के चुनावों में नीतीश को कांग्रेस के भोला सिंह ने हरनौत सीट से हरा दिया था। उस वक्त हताश-निराश नीतीश ने अपने दोस्त मुन्ना सरकार से कहा था कि, "ऐसे कैसे होगा, लगता है कोई बिजनस करना होगा।" उन्होंने बताया कि लगातार नाकामी से नीतीश के परिवार का हौसला डिगने लगा था। परिवार को लगता था कि इंजियरिंग की डिग्री पर उन्हें तब भी नौकरी मिल सकती थी।

एक अंग्रेजी चैनल के कार्यक्रम में यशवंत देशमुख ने कहा कि, नीतीश के दोस्त नरेंद्र के हवाले से किताब में बताया है कि उन्होंने नीतीश को चुनाव जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। नीतीश की पत्नी मंजू ने भी अपनी बचत से 20 हजार रुपये दिए थे।" आखिरकार, 1985 के चुनाव में नीतीश को जीत हांसिल हो गई। 339 पेज की इस किताब में बताया गया है कि नीतीश कुमार और अन्य कई नेता 1974 के लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से उभरे थे।

परिवार ने भी किए थे समझौते-
1985 चुनाव के दौरान नीतीश ने अपनी पत्नी मंजू, जो अपने पिता के गांव के एक सरकारी हाई स्कूल में पढ़ाती थीं, ने राजनीति में किस्मत आजमाने के लिए एक आखिरी मौका देने के लिए कहा। भोला सिंह के खिलाफ फिर से चुनाव लड़ने के लिए फंड का इंतजाम नीतीश के दोस्त ने किया।

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