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चावल मिल के क्लर्क से सीएम तक ऐसा रहा बुकंकरे सिद्दालिंगप्पा येदियुरप्पा का सफर

किसान नेता के रूप में पहचान बनाने वाले बीएस येदियुरप्पा का चावल मिल के क्लर्क से लेकर सीएम बनने तक का सफर काफी दिलचस्प रहा...

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नई दिल्ली। बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार की सुबह 9 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्हें राज्यपाल वजुभाई वाला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। येदियुरप्पा ने 10 साल में तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है। आइए एक नजर डालते हैं बुकंकरे सिद्दालिंगप्पा येदियुरप्पा के अब तक के सफर पर...


किसान नेता के रूप में मिली पहचान
कर्नाटक के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में सिद्दालिंगप्पा और पुत्तथयम्मा के घर 27 फरवरी 1943 को जन्मे येदियुरप्पा ने चार साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1972 में शिकारीपुरा तालुका के जनसंघ अध्यक्ष के रूप में की थी। इमरजेंसी के दौरान वे बेल्लारी और शिमोगा की जेल में भी रहे. यहां से उन्हें इलाके के किसान नेता के रूप में जाना जाने लगा था। साल 1977 में जनता पार्टी के सचिव पद पर काबिज होने के साथ ही राजनीति में उनका कद और बढ़ गया।

चावल मिल के क्लर्क से सीएम तक
कर्नाटक की राजनीति में 75 साल के बीएस येदियुरप्पा की बदौलत बीजेपी साल 2008 में दक्षिण में पहली बार कमल खिलाने में कामयाब रही थी। येदियुरप्पा इतना मजबूत नाम है कि अनंत हेगड़े और प्रताप सिम्हा के 'हिंदुत्व' को नजरंदाज कर पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले ही सीएम कैंडिडेट के लिए उनके नाम की घोषणा कर दी थी। चावल मिल के क्लर्क से जमीनी किसान नेता और फिलहाल कर्नाटक में लिंगायतों के सबसे बड़े नेता येदियुरप्पा कई मुश्किलों से गुजर कर यहां तक पहुंचे हैं। उनकी सरकार गिराई गई, घोटाले के आरोपों से घिर गए और बीजेपी से अलग होकर 'कर्नाटक जनता पक्ष' नाम की पार्टी तक बना ली। हालांकि 2014 में फिर बीजेपी में लौटे और अब तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. हालांकि अभी उनकी अग्नि परीक्षा खत्म नहीं हुई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार से कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई शुरू होगी।