
कांग्रे-जेडीएस गठबंधन में दरार डालने के लिए भाजपा ने चली ये बड़ी चाल !
नई दिल्ली। कर्नाटक में 10 दिन चले सियासी नाटक के बाद अंतत: कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बन गई है। भारतीय जनता पार्टी के सारे दांव-पेंच धरे के धरे रहे गए और एचडी कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने शुक्रवार को विधानसभा में बहुमत भी साबित कर दिया। उसी दिन केंद्र सरकार ने इस गठबंधन में दरार के प्रयास भी तेज कर दिए।
लिंगायत से जुड़े दो प्रस्ताव वापस भेजे
कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कर्नाटक की पिछली सरकार की तरफ से भेजे गए दो प्रस्तावों को वापस भेज दिया है। प्रस्ताव वापस भेजते हुए फिर से नई सरकार द्वारा इसकी सिफारिश कराने को कहा है। बता दें कि कर्नाटक विधान सभा चुनावों से कुछ हफ्ते पहले कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने केंद्र सरकार से लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने और राज्य के लिए अलग झंडा देने की इजाजत देने का अनुरोध किया था। चुनाव से पहले लिए गए कर्नाटक सरकार के इस फैसले को चुनावी कार्ड के तौर पर देखा गया। मीडिया रिपोर्टस में कहा जा रहा है कि तब केंद्र सरकार इन दोनों फाइलों को रोक लिया था। अब कर्नाटक की सत्त पर नई सराकर बनी है। नई सरकार बनते ही केंद्र ने गेंद को फिर से राज्य सरकार के पाले में डाल दिया है।
पड़ेगी कांग्रेस- जेडीएस में दरार !
कर्नाटक में अब कांग्रे- जेडीएस गठबंधन की सरकार है।ऐसे में कोई भी फैसला दोनों दलों की समन्वय समिति द्वारा एक सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम के तहत होना है। कांग्रेस का प्रयास रहा है कि राज्य के लिए अलग झंडा और लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए लेकिन जेडीएस इसके खिलाफ रही है। ऐसे में यह मामला उलझता हुआ नजर आ रहा है। उधर लिंगायत वोट बैंक पर पारंपरिक रूप से भाजपा का कब्जा रहा है। आप को यहां ये बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले कई बार लिंगायत और वीरशैव लिंगायत को धार्मिक अल्पसंख्यकों का दर्जा देने के कदम को हिंदुओं को बांटने वाला बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि लिंगायत समुदाय के सभी महंतों का कहना है कि समुदाय को बंटने नहीं देना है। मैं ये भरोसा दिलाता हूं कि इसे बंटने नहीं दिया जाएगा"
Published on:
26 May 2018 01:13 pm
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