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फसल बीमा योजना में अंशदान घटाने पर चिदंबरम का केंद्र पर तंज, सरकार का ये कदम सबसे बड़ा किसान विरोधी

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (Former Finance Minister and senior Congress leader P Chidambaram ) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana ) को स्वैच्छिक बनाने को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।

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फसल बीमा योजना में अंशदान घटाने पर चिदंबरम ने केंद्र पर कसा तंज, सरकार का ये कदम सबसे बड़ा किसान विरोधी

फसल बीमा योजना में अंशदान घटाने पर चिदंबरम ने केंद्र पर कसा तंज, सरकार का ये कदम सबसे बड़ा किसान विरोधी

नई दिल्ली। यूपीए सरकार में रहे वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (Former Finance Minister and senior Congress leader P Chidambaram ) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana ) को स्वैच्छिक बनाने को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। फसल बीमा योजना में केंद्र के अंशदान घटाने को लेकर पी चिदंबरम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का ये कदम सबसे बड़ा किसान विरोधी है।

गुरुवार को सरकार को अड़े हाथ लेते हुए कहा कि फसल बीमा योजना के दायरे में अधिक जमीन लाने की जरूरत है और इस योजना का कवरेज घटाने से लाखों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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सरकार का फैसला किसान विरोधी

गौरतलब है कि बुधवार को कैबिनेट बैठक में फसल बीमा योजना में केंद्र द्वारा अपना अंशदान घटाते हुए स्वैच्छिक बनाने का ऐलान किया गया। इसको लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक के बाद एक ट्वीट कर लिखा कि इससे ज्यादा बड़ा किसान विरोधी कदम और क्या हो सकता।’

इसमें अब ऐसे किसान, सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को अपनाने या न अपनाने को स्वतंत्र होंगे जिन्होंने फसल कर्ज ले रखा है या जो फसल कर्ज लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आखिर सरकार को ये फैसला लेने की ऐसी आवश्यकता क्यों पड़ी।

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कैबिनेट ने अंशदान घटाने का लिया फैसला

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाया गया है। अब तक, ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा अनिवार्य था, जिनकी संख्या लगभग 58 प्रतिशत रही है। गैर-ऋणी किसानों का प्रतिशत लगभग 42 था, जो 2015 से पहले केवल 5 प्रतिशत था।

तोमर ने कहा कि कुछ राज्यों, किसान और किसान संगठनों को लगा कि इस योजना को स्वैच्छिक बनाया जाना चाहिए। इसलिए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज इसे स्वैच्छिक बनाने का फैसला किया है।