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अमेरिका ने मणिपुर हिंसा पर की मदद की पेशकश, कांग्रेस नेता ने दिया ये जवाब

हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। इसमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। एरिक गार्सेटी की टिप्‍पणी के एक दिन बाद विपक्षी कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि

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लंबे समय से भड़की हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। इसमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। वहीं हजारों लोग बेघर हो गए हैं, जो राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि मणिपुर की स्थिति मानवीय चिंता का विषय है और हिंसा में जानमाल के नुकसान की परवाह करने के लिए किसी को भारतीय होना जरूरी नहीं है। गार्सेटी ने आगे कहा कि अगर कहा जाए तो अमेरिका मणिपुर में मदद के लिए तैयार है। मणिपुर हिंसा को लेकर भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की टिप्पणी के एक दिन बाद विपक्षी कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि देश के आंतरिक मामलों के बारे में किसी अमेरिकी राजदूत द्वारा इस तरह की बयानबाजी पहले कभी नहीं की गई है।

अमेरिका मणिपुर में मदद के लिए तैयार

भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने मणिपुर हिंसा पर कहा कि, मुझे नहीं लगता कि यह रणनीतिक चिंताओं के बारे में है, यह मानवीय चिंताओं के बारे में है। जब इस तरह की हिंसा में बच्चे या व्यक्ति मरते हैं तो आपको इसकी परवाह करने के लिए भारतीय होने की ज़रूरत नहीं है। हम शांति को कई अच्छी चीजों के लिए एक मिसाल के रूप में जानते हैं। पूर्वोत्तर और पूर्व में बहुत प्रगति हुई है... अगर पूछा जाए तो हम किसी भी तरह से सहायता करने के लिए तैयार हैं। हम जानते हैं कि यह एक भारतीय मामला है और हम इसके लिए प्रार्थना करते हैं शांति और यह जल्दी आ सकती है। क्योंकि अगर शांति कायम हो तो हम अधिक सहयोग, अधिक परियोजनाएँ, अधिक निवेश ला सकते हैं।

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अमेरिका में बंदूक हिंसा होती है

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विरोध जताते हुए कहा कि, मणिपुर में जो हो रहा है वह दुखद है। पीएम को बहुत पहले ही वहां जाना चाहिए था और बोलना चाहिए था। गृह मंत्री को वहां हालात सामान्य होने तक लगातार राज्य का दौरा करना चाहिए था...हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। जहां तक अमेरिकी राजदूत का सवाल है, देश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन भारत ने कभी भी अपने आंतरिक मामलों के लिए किसी भी बयान की सराहना नहीं की है। अमेरिका में बंदूक हिंसा होती है और कई लोग मारे जाते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि, हमने अमेरिका से कभी नहीं कहा कि वह हमसे सीखे कि कैसे करना है उस पर लगाम लगाने के लिए। अमेरिका को नस्लवाद को लेकर दंगों का सामना करना पड़ता है। हमने उन्हें कभी नहीं बताया कि हम उन्हें व्याख्यान देंगे...शायद नए राजदूत के लिए भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास का संज्ञान लेना महत्वपूर्ण है।