
राहुल गांधी ने वायनाड पर ही क्यों लगाया दांव, दादी इंदिरा और मां सोनिया भी कर चुकी हैं दक्षिण का रुख
नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मिशन साउथ का आगाज कर दिया है। राहुल गांधी ने पहले केरल की वायनाड सीट से नामांकन दाखिल किया और उसके प्रियंका गांधी के साथ रोड शो किया। वहीं, भाजपा ने राहुल गांधी को रणछोड़ करार दिया है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने अमेठी में हार के डर से दक्षिण का रुख किया है। हालांकि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी ने हार का डर नहीं, बल्कि दक्षिण राज्य पर पैनी नजर रखने के लिए किया है। ऐसे में अहम सवाल यह भी कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आखिर केरल की वायनाड सीट को ही अपने लिए क्यों चुना?
दरअसल, ऐसा पहली बार नहीं है जब कांग्रेस का कोई बड़ा नेता दक्षिण की सीट से चुनाव लड़ रहा है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1978 में कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट से लोकसभा उपचुनाव जीता था। सोनिया गांधी ने 1999 में कर्नाटक की ही बेल्लारी सीट से विजय पताका लहराया था। माना जा रहा कि अब राहुल दादी और मां की तरह खुद दक्षिण की शरण में हैं।
2014 लोकसभा चुनाव—
कांग्रेस— 41.21 प्रतिशत
भाजपा— 9 प्रतिशत
वाम दल— 39 प्रतिशत
वहीं, कांग्रेस नेताओं की मानें तो राहुल गांधी के वायनाड से लड़ने से दक्षिण की 70 से 80 सीटों पर फर्क पड़ेगा। इनमें केरल की 20, तमिलनाडु की 39 और कर्नाटक में 28 सीटों पर असर पड़ेगा।
आबादी—
हिन्दू— लगभग 49.48 प्रतिशत
मुस्लिम— 28.65
ईसाई— 21.34
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Updated on:
04 Apr 2019 03:10 pm
Published on:
04 Apr 2019 02:10 pm

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