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2019 को ध्यान में रखकर राहुल गांधी की दावत-ए-इफ्तार, पहुंचेंगे विपक्ष के कई दिग्गज

रोज़ा इफ्तार के जरिए कांग्रेस पूरे विपक्ष को भी इकट्ठा करने की तैयारी कर रही है।
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नई दिल्ली

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Saif Ur Rehman

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Updated: 9 Jun 2018, 12:19 PM IST

rahul

2019 को ध्यान में रखकर राहुल गांधी की दावत-ए-इफ्तार, पहुंचेंगे कई विपक्ष के दिग्गज

नई दिल्ली।राहुल गांधी भी इफ्तार की दावत देने जा रहे हैं। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस 13 जून को रोजा इफ्तार का आयोजन कर रही है।बताया जा रहा है कि कांग्रेस के मुस्लिम विभाग ने राहुल गांधी इफ्तार का निवेदन किया था, जिसे राहुल गांधी ने स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बैठक करने के बाद तारीख और जगह तय कर दिए है। दिल्ली के ताज पैलेस होटल में कांग्रेस की ये इफ्तार पार्टी रखी गई है। दावत में राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी न्योता नहीं भेजा गया है लेकिन आने वाले एक दो दिनो में नेताओं की सूची भी बना ली जाएगी, जिन्हें इस इफ्तार पार्टी में बुलाया जाएगा।

पहुंचेंगे विपक्ष के कई नेता
राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद ये रोज़ा इफ्तार का पहला कार्यक्रम है, जिसमें विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को बुलाने का इरादा है। रोज़ा इफ्तार के जरिए कांग्रेस पूरे विपक्ष को भी इकट्ठा करने की तैयारी कर रही है। कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी स्टार गेस्ट बताए जा रहे हैं। एचडी देवगौड़ा को भी निमंत्रण भेजा जा रहा है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती को दावतनामा भेजे जाने की योजना है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी कांग्रेस की तरफ से कार्ड भेजा जाएगा। एनसीपी नेता शरद पवार और गैर भाजपा दलों के सभी बड़े नेताओं को बुलाने की योजना है। साथ ही विदेशी राजदूतों को भी इस प्रोग्राम में बुलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व लाइन पर चल रही है।

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हाल ही में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ढेरों मंदिर, मठों में दर्शन के लिए गए। एक दम से मंदिरों की तरफ छुकाव होने से राहुल की आलोचना हुए। लेकिन इसे समझे के लिए थोड़ा पीछे वर्ष 2014 में चलते हैं। जब लोकसभा चुनाव में पार्टी की शिकस्त का सामना करने पड़ा इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई। जिसने कहा कांग्रेस की हार की मुख्य वजह पार्टी के हिंदू विरोधी और मुस्लिम समर्थक हैं। जिसके बाद पार्टी ने कई बार कोर्स करेक्शन करने की कोशिश की। लेकिन एक बार फिर से मुसलमानों के बीच घटती लोकप्रियता और 2019 के चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस ने नई सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी, जिसमें वो अपनी पुरानी छवि को लेकर चलना चाहती है।

इफ्तार के साथ पार्टी शब्द कैसे जुड़ा ये जानने के लिए यहां क्लिक करें।

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