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रफाल पर एके एंटनी को रक्षा मंत्री का जवाब, यूपीए सरकार में घटी लड़ाकू विमानों की संख्या

एके एंटनी ने कहा था कि मोदी सरकार केवल 36 रफाल लड़ाकू विमानों का आर्डर देकर राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई युद्ध की तैयारियों को खतरे में डाल रही है।

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Chandra Prakash Chourasia

Sep 18, 2018

Nirmala Sitharam

रफाल पर एके एंटनी को रक्षा मंत्री का जवाब, यूपीए सरकार में घटी लड़ाकू विमानों की संख्या

नई दिल्ली। रफाल लड़ाकू विमानों पर मचे सियासी बयानों के बीच यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री रहे एके एंटनी को अब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया है। सिर्फ 36 विमानों की डील क्यों हुई, इसके जवाब में सीतारमण ने कहा कि स्क्वॉर्डन्स की आर्दश क्षमता 42 लड़ाकू विमानों की है। यूपीए सरकार में ही यह क्षमता कम होने लगी थी और 2013 आते-आते यह घटकर 33 हो गई।

यूपीए बताए एचएएल से समझौता क्यों नहीं हुआ: रक्षा मंत्री

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की क्षमता को लेकर उठे सवाल पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के वक्त रफाल समझौता हो ही नहीं पाया था और न ही एचएएल और दसॉल्ट के बीच उत्पादन को लेकर सहमति बन पाई। सिर्फ इसी वजह से रफाल और एचएएल के बीच समझौता नहीं हो पाया। अब कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए को जवाब देना चाहिए कि वे पिछली डील में भारतीय वायुसेना और एचएएल के हितों का ख्याल क्यों नहीं रखी थी।

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126 की जगह 36 रफाल क्यों खरीदा: एंटनी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फ्रांस से खरीदे जाने वाले रफाल लड़ाकू विमानों की संख्या घटाकर 36 करने पर 'राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के साथ गंभीर समझौता' करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान संदर्भ में, खतरे की धारणा में काफी वृद्धि हुई है और आईएएफ को पहले के मुकाबले 126 लड़ाकू विमानों से ज्यादा विमानों की जरूरत है। हालांकि जरूरतों को पूरा करने के स्थान पर, मोदी सरकार केवल 36 रफाल लड़ाकू विमानों का आर्डर देकर राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई युद्ध की तैयारियों को खतरे में डाल रही है।

सीतारमण पर लगाया एचएएल को नीचा दिखाने का आरोप

एंटनी ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के उन दावों पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के पास भारत में जेट बनाने की आवश्यक क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने एचएएल की छवि को धूमिल किया है, एचएएल एकमात्र कंपनी है, जो भारत में लड़ाकू विमानों का निर्माण कर सकती है। हम नहीं जानते कि उनके मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक उपक्रम को नीचा दिखाने का उनका इरादा क्या है। उन्होंने पार्टी की अपनी मांग को दोहराते हुए पूर्ववर्ती संप्रग सरकार में जेट विमानों की कीमत और मौजूदा राजग सरकार में तय की गई कीमतों का खुलासा करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मामले में एक संयुक्त संसदीय जांच(जेपीसी) की मांग की।