
धारा 377 पर संघ और भाजपा में अलग-अलग सुर, खत्म हो 377, निजता पर हमला गलत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी नई न्यू जेनरेशन समलैंगिकता जैसे कानून के विरोध में उतर आई है। उनका मानना है कि समलैंगिकता से जुड़ी धारा 377 को खत्म किया जाना चाहिए। दरअसल, ये विचार आरएसएस से जुड़े संगठन इंडिया फाउंडेशन हैं। आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश के कसौली में शनिवार को शुरू हुए दो दिवसीय युवा विचार शिविर में वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। शिविर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई अहम मुद्दों के साथ धारा 377 पर भी चर्चा की गई। इस मौके पर भाजपा महासचिव राम माधव व संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
निजता पर हमला ठीक नहीं
कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए संगठन से जुड़े युवाओं ने संघ के प्रस्ताव के साथ-साथ हमसफर ट्रस्ट और नाज फाउंडेशन की पेटिशंस की स्टडी के आधार पर कहा कि निजता पर हमला ठीक नहीं है। हालांकि समलैंगिकता पर भाजपा का विचार इन युवाओं से भिन्न दिखाई दी। वहीं, कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे एक विचारक के अनुसार धारा 377 पर चर्चा के बाद यह आम सहमति बनी कि समलैंगिकता निजता के अधिकार के दायरे में आता है, लिहाजा इसके साथ छेड़छाड़ उचित नहीं है। हालांकि इस दौरान समलैंगिकता को लेकर अंग्रेजी मॉडल का विरोध किया गया।
सुनवाई पूरी
आपको बता दें कि आईपीसी धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। धारा 377 के अभी तक के प्रावधानों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रकैद या जुर्माने सहित 10 साल कैद की सजा सुनाई जा सकती है। आईपीसी के इसी प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में दो वयस्कों के बीच बनने वाले संबंध को अपराध के दायरे से बाहर रखने की मांग की है।
Updated on:
30 Jul 2018 09:21 am
Published on:
30 Jul 2018 09:03 am
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