
मुंबई : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरा शरद पवार पर महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने सिर्फ शरद पवार पर ही मनी लॉन्ड्रिंग का केस नहीं दर्ज किया है, बल्कि उनके भतीजे अजित पवार समेत कुल 70 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि अजित पवार भी विपक्ष के बड़े चेहरों में से एक हैं। इस कारण शरद पवार और अजित पवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसका असर 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में राकापा और कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं पर पड़ेगा।
इस मामले में बनाया गया है आरोपी
शरद पवार और महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के जयंत पाटिल समेत कई डायरेक्टर पर बैंकिंग और आरबीआई के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। आरोप है कि कथित तौर पर चीनी मिल को कम दरों पर कर्ज दिया गया था और डिफॉल्टर्स की संपत्तियों को सस्ती कीमत पर बेच दिया गया था। इस कारण 2007 से 2011 के बीच चार साल में बैंक को तकरीबन 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। उस समय महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रह चुके अजित पवार वित्त मंत्री थे और वह भी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल थे। नाबार्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर शरद पवार्र अजित पवार समेत 70 लोगों को बैंक घोटाले का आरोपी बनाया गया है। इस घोटाले को करीब 25 हजार करोड़ रुपए का बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
विपक्ष की चुनावी संभावनाओं पर पड़ेगा असर
बता दें कि शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरों में एक हैं। इन पर एफआईआर दर्ज होने से विपक्ष की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। अगर ईडी ने इन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया, जिसकी पूरी संभावना है तो विपक्ष नेताविहीन हो जाएगा। उनकी तरफ से प्रचार करने के लिए कोई स्थानीय स्टार नेता नहीं रहेगा।
Updated on:
25 Sept 2019 07:30 am
Published on:
24 Sept 2019 09:49 pm
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