
नई दिल्ली. महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। अब गेंद भाजपा सरकार के पाले में है, क्योंकि उनके पास इस बिल को पास कराने के लिए पर्याप्त आंकड़े हैं। जानिए पॉइंट्स में वोट के अधिकार से चुनाव लडऩे तक के महिला अधिकारों वाले महिला आरक्षण बिल की कहानी...
1917 : ब्रिटिश सरकार के तत्कालीन भारत मंत्री ईएस मांटेग्यु 1917 में भारत आए। 1 दिसंबर, 1917 को पांच महिलाओं का एक शिष्टमंडल उनसे मद्रास में मिला और महिलाओं के लिए मताधिकार की मांग रखी।
1919 : जब द गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया बिल पेश किया गया तो एनी बिसेंट, सरोजिनी नायडू और हीराबाई ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिए जाने की वकालत की। मामले को तब चुनी हुई सरकारों के विवेक पर छोड़ दिया गया।
1920 : त्रावणकोर पहला और 1921 में मद्रास दूसरा राज्य था जिसने महिलाओं को सीमित मतदान का अधिकार दिया। यह अधिकार केवल शिक्षित महिलाओं को दिए गए थे।
1931-32 : लार्ड लोथियन समिति ने महिलाओं को मताधिकार देने की दो शर्तें रखीं। पहली किसी भी भाषा में साक्षर महिला को मताधिकार दिया जाए। दूसरा वह किसी की पत्नी हों। इसका मतलब यह था कि विधवाएं या किसी कारण से विवाह न करने वाली महिलाएं वोट नहीं डाल सकती थीं।
1952 : संसद में 4.50% महिलाएं थीं, वहीं 2014 में यह प्रतिशत 12.15% ही हो सका।
पेश हुआ लेकिन पास नहीं
1993 : 73वें संवैधानिक संशोधन से पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद हुए 1996 के लोकसभा चुनाव में सभी मुख्य राजनीतिक पार्टियों ने संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को अपने चुनावी घोषणापत्रों में रखा।
1996 : यूनाइटेड फ्रंट के पीएम एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार ने सबसे पहले महिला आरक्षण बिल को 4 सितम्बर, 1996 को लोकसभा में पेश किया।
1998 :अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 12वीं लोकसभा में फिर पेश किया। भाजपा नीत एनडीए सरकार ने इसे चार बार लोकसभा में पेश किया और हर बार हंगामे के बाद इसे पारित नहीं किया जा सका।
2005 : देश में बिहार पहला राज्य था। यहां स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
2010 : कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने भी इसे दो बार संसद में पेश किया। मार्च 2010 में राज्यसभा ने इस बिल को पारित भी कर दिया, लेकिन उसके बाद चार साल (15वीं लोकसभा के भंग होने तक) तक यह बिल लोकसभा में पेश नहीं हो सका।
आरक्षण का असर
जब ग्राम पंचायतों में पहली बार 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया तब पंचायतों में 43 प्रतिशत महिलाएं चुन कर आईं थीं।
Published on:
22 Sept 2017 02:08 pm
बड़ी खबरें
View Allराजनीति
ट्रेंडिंग
