
Ghulam Nabi Azad Resigns From All Positions Including Primary Membership Of Congress
कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को एक बार फिर कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। कपिल सिब्बल के बाद जी 23 समूह के दूसरे बड़े नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा ऐसे वक्त पर आया है जब कांग्रेस अपने पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव को लेकर संघर्ष कर रही है। 28 अगस्त को इसी कड़ी में एक अहम बैठक होने वाली है। लेकिन इससे पहले ही गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा कांग्रेस की परेशानी और बढ़ा सकता है। गुलाम नबी आजाद ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को सौंप दिया है।
आजाद जम्मू-कश्मीर में अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के कुछ घंटों बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे कि गुलाम नबी आजाद ज्यादा दिन कांग्रेस में नहीं रहेंगे।
दरअसल सोनिया गांधी चाहती थीं कि कांग्रेस जम्मू कश्मीर में आजाद के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़े। यही वजह थी कि उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।
मिली जानकारी के मुताबिक, गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को पांच पन्नों का अपना इस्तीफा भेजा है। गुलाम नबी आजाद ने अपने इस लेटर में कांग्रेस बुरा हालत के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा है कि, 2019 के बाद पार्टी की हालत और बदतर हुई है। राहुल गांधी का अध्यादेश फाड़ना अपरिपक्वता थी। गुलाम नबी ने कहा कि पार्टी में सभी वरिष्ठ नेताओं को किनारे कर दिया गया है। संगठन के अंदर चुनाव का ड्राम चल रहा है।
आजाद ने कहा है कि, कांग्रेस के सभी फैसले रिमोट कंट्रोल मॉडल से लिए जा रहे हैं। फैसले राहुल गांधी और उनके सुरक्षाकर्मी ले रहे हैं। उन्होंने ये भी लिखा है कि कांग्रेस की इस हालत के जिम्मेदार राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी हार मिली है। 39 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा है। भारत जोड़ो यात्रा की जगह कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालनी चाहिए।
गुलाम नबी आजाद ने 1973 ने भलस्वा में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। यही वो वक्त था जब कांग्रेस की नजर अपने भावी नेता पर पड़ी और कांग्रेस ने आजाद की सक्रियता और शैली को देखते हुए उन्हें युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना।
उन्होंने महाराष्ट्र में वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से 1980 में पहला संसदीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद 1982 में गुलाम नबी आजाद केंद्रीय मंत्री के रूप में कैबिनेट में जगह बनाने में सफल रहे।
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वर्ष 2005 में गुलाम नबी आजाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। यहीं से कांग्रेस में उनका कद कुछ और ऊंचा हो गया। आजाद के इस दौरान जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में 21 सीटों पर जीत का परचम लहराया था।
इसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी।
आजाद ने 2008 में भद्रवाह से जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए। इसके बाद 2009 में चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुना गया और बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में नियुक्त हुए। गुलाम नबी आजाद वर्ष 2014 में राज्यसभा में विपक्ष के नेता चुने गए। जबकि 2015 में पांचवीं बार राज्यसभा के लिए फिर से चुने गए।
गुलाम नबी आजाद के राज्यसभा में कार्यकाल खत्म होने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी जमकर तारीफ की थी। उस दौरान ये भी कहा जाने लगा था कि शायद आजाद पाला बदल लें। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
Updated on:
26 Aug 2022 12:12 pm
Published on:
26 Aug 2022 11:51 am
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