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लाल किले के सौदे की खबर पर सरकार ने दी सफाई, जानिए क्या हैं डालमिया डील की शर्तें

जिस ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से हर साल प्रधानमंत्री का भाषण होता है अचानक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी को देने से बवाल खड़ा हो गया।

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नई दिल्ली। दिल्ली स्थित जिस ऐतिहासिक विरासत लाल किले की प्राचीर से हर साल प्रधानमंत्री का भाषण होता है अचानक उसके लिए हुए सौदे की खबर से बवाल खड़ा हो गया। विपक्ष ने जहां जमकर विरोध जताया वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने चुटकी ली। लेकिन अब सरकार ने इस मामले में सफाई पेश की है। सरकार ने 'एडॉप्ट अ हेरिटेज' नाम की योजना के तहत लाल किले का ठेका डालमिया ग्रुप को सौंप दिया है।

ऐतिहासिक विरासतों का ठेका निजी हाथों में कैसे?
दरअसल, 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बनवाए गए लाल किले के रखरखाव की जिम्मेदारी सरकार ने डालमिया ग्रुप को दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने जमकर आलोचना की और लाल किले का ठेका निजी कंपनी को कैसे दे सकती है।

सरकार की सफाई
सरकार ने कहा कि लाल किले को बेचा नहीं गया है, जो एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) हुआ है वह सिर्फ इस विरासत के रखरखाव के लिए है। आलोचनाओं के बीच पर्यटन मंत्रालय ने सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि डालमिया भारत लिमिटेड के साथ हुआ समझौता स्मारक के अंदर और इसके चारों ओर पर्यटक क्षेत्रों के विकास एवं रख-रखाव के लिए है।

क्या-क्या है इस एमओयू में?
डालमिया भारत समूह एमओयू के तहत स्मारक का रखरखाव करेगा। इसके इर्द-गिर्द आधारभूत ढांचा तैयार करेगा। पांच सालों में करीब 25 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। सरकार की तरफ से इस कदम को 17वीं शताब्दी के इस स्मारक को बचाने की कवायद बताया जा रहा है।

विपक्ष का निशाना
मोदी सरकार के इस फैसले पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया रही। ममता बनर्जी ने इसे इतिहास के लिए काला दिन करार दिया। वहीं कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की आजादी के प्रतीक लाल किले को कॉर्पोरेट के हाथों में बंधक बनाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या बीजेपी लाल किले का महत्व समझती है।

विपक्ष को ये आपत्तियां
- कांग्रेस ने पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि अब लाल किले का टिकट निजी कंपनी जारी करेगी?
- सीपीएम ने कहा कि यह समझौता डालमिया ग्रुप को लाल किले के जरिये अपनी ब्रांडिंग करने की आजादी देता है।
- तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि क्या सरकार अब ऐतिहासिक विरासतों का रखरखाव भी नहीं कर पा रही है।

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