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6 बार बिना प्रचार जीता था ये BJP प्रत्याशी, पर इस बार नहीं मिला जनता का साथ

गुजरात के जूनागढ़ से कांग्रेस के भीखाभाई जोशी ने जीत हासिल की है। जोशी ने छह बार विधायक रह चुके बीजेपी के महेन्द्र मशरू 6 हजार वोटों से मात दी है
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नई दिल्ली

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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 18 Dec 2017, 2:59 PM IST

Gujarat election

नई दिल्ली। गुजरात के जूनागढ़ सीट से कांग्रेस के भीखाभाई जोशी ने जीत हासिल की है। जोशी ने छह बार विधायक रह चुके बीजेपी के महेन्द्र मशरू 6 हजार वोटों से मात दी है। महेन्द्र मशरू की साफ सुधरी छवि की वजह से इसे बीजेपी का गढ़ माना जाता था, भीखाभाई जोशी की यह जीत एक रिकॉर्ड जीत है।

पैदम घूमकर करते थे प्रचार
हर चुनाव की तरह इस बार भी महेन्द्र मशरू को शोर-शराबा, चकाचौंध और रैली-जूलूस के बगैर ही इस घूमकर प्रचार करते देखे गए थे। उनकी सादगी और इमानदारी की वजह से ही हर बार उन्हें रिकॉर्ड वोट मिलते थे लेकिन इस बार हालात बदल गए।

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निर्दलीय ही सबकी जमानत जप्त करवाई थी
मशरू वर्ष 1990 से चुनाव लड़ रहे। 1995 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्होंने भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस समेत अन्य सभी प्रत्याशियों को इतने भारी अंतर से हराया कि सभी की जमानत जप्त हो गई थी। ऐसा शायद पहली बार हुआ था। बाद में भाजपा ने मशरू को अपने साथ ले लिया और वर्ष 1998 से लेकर 2012 तक सभी चुनाव उन्होंने भाजपा के बैनर तले जीते।

ना सैलरी, ना गाड़ी, बस! बस में सफर..
उनकी सादगी को देख हर कोई दंग रह जाता है। ये ऐसे विधायक हैं जो न तो सैलरी लेते हैं और ना ही पेंशन लेंगे। ना ही उन्होंने विधायक को दिया जाने वाला गांधीनगर में प्लॉट स्वीकार किया। खुद का वाहन भी नहीं, गांधीनगर में विधायक निवास से विधानसभा तक राज्य सरकार विधायकों को लाने-ले जाने के लिए जो बस चलाती है, उसी में मशरू सफर करते हैं। विधानसभा सत्र पूरा होने के बाद गांधीनगर से बस में ही बैठकर वे जूनागढ़ चले जाते हैं। कई बार घर के आसपास सड़कों और नालियों की सफाई के लिए वो खुद कीचड़ में उतर जाते हैं।

सेवा के लिए नहीं की शादी
अब सवाल उठता है कि जब वे सैलरी नहीं लेते तो क्या काम-धंधा करते हैं? बता दें कि उन्होंने तीन दशक बैंक में नौकरी की, जो भी फंड और ग्रेच्युटी मिली, वही उनके लिए पर्याप्त है। सादगी पसंद मशरू ने शादी भी नहीं की है। वे एक कमरे में ही मशरूफ रहते हैं। उन्होंने जनसेवा भी इस कदर कि कोई भी उनके पास समस्या लेकर पहुंच जाए वे उसी के साथ हो लिए होते हैं।

थैला उठाकर जुट जाते हैं सफाई में
हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा तक जूनागढ़ में गिरनार पहाड़ी की परिक्रमा होती है। उस वक्त लोग रास्ते में पानी की बोतल, प्लास्टिक और कूड़ा-करकट फेंक देते हैं। मशरू हाथों में थैला लेकर परिक्रमा मार्ग से कचरा बीनते हैं। उनके चेहरे पर कोई झिझक नहीं दिखाई देती कि वे एक विधायक हैं।

‘मां ने कहा था कि सरकारी सुविधा नहीं लेना’
उन्होंने पत्रिका को बताया कि जब पहली बार चुनाव जीतकर आया तब मां ने कहा कि यदि जनता की सेवा करना है तो कोई सरकारी सुविधा नहीं लेना है। बस, मां के वे शब्द अभी भी याद हैं। उनका यह भी मानना था कि यदि शादी की तो जनसेवा से भटकाव आ जाएगा।