अमित शाह को जान का खतरा, गृह मंत्रालय ने चुनाव से पहले बढ़ाई भाजपा अध्यक्ष की सुरक्षा

अमित शाह को जान का खतरा, गृह मंत्रालय ने चुनाव से पहले बढ़ाई भाजपा अध्यक्ष की सुरक्षा

Mohit sharma | Publish: Sep, 28 2018 09:48:58 AM (IST) राजनीति

हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों ने अमित शाह की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, जिसमें उनकी जान को खतरा बताया गया है।

नई दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जान को खतरा बना हुआ है। यह हम नहीं बल्कि सुरक्षा एजेंसिया कह रही है। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों ने अमित शाह की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, जिसमें उनकी जान को खतरा बताया गया है। मामले से जुड़ी आईबी की खूफिया रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय ने अब भाजपा अध्यक्ष की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने शाह की सुरक्षा बढ़ाकर अब जेड प्लस प्लस कर दी है। हालांकि इससे पहले उनको जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। 2014 के तुरंत बाद मिली इस श्रेणी की सुरक्षा में उन्हे 36 सुरक्षाकर्मी मिले हुए थे, जिसमें 10 एनएसजी और एसपीजी कमांडो और बाकी पुलिस दल के लोग शामिल थे।

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राज्यों को चिट्ठी लिखकर सूचना दी

गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में सभी राज्यों को चिट्ठी लिखकर सूचना दी गई है। दरअसल, इस साल राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में होने हैं, जबकि अगले साल 2019 में लोकसभा चुनाव भी कराए जाने हैं। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष को देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार दौरा करने होंगे। आपको बता दें कि शाह की सुरक्षा व्यवस्था पर खर्चे को लेकर उठे सवाल पर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने ब्यौरा देने से इनकार कर दिया था। आयोग ने इसके लिए आरटीआई कानून के ‘निजी सूचना’ और ‘सुरक्षा’ संबंधी छूट वाले प्रावधानों का हवाला दिया था।

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शाह की सुरक्षा पर होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा

दरअसल, दीपक जुनेजा नाम के शख्स ने 5 जुलाई, 2014 को आवेदन कर आयोग से किसी व्यक्ति को सुरक्षा घेरा प्रदान करने संबंधी नियमों के बारे में पूछा था। याचिकाकर्ता ने उन लोगों की सूची भी मांगी थी, जिन्हे सरकार ने सुरक्षा मुहैया करा रखी है। जुनेजा ने कहा था कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को जुलाई 2014 से गृह मंत्रालय ने जेड प्लस श्रेणी का सुरक्षा प्रदान कर रखी है, वह भी तब जब वह किसी सांविधानिक या वैधानिक पद पर नहीं हैं। आपको बता दें कि उस समय अमित शाह राज्यसभा के सदस्य नहीं थे। जुनेजा ने सुरक्षा पर खर्च होने वाले जनता के धन का हवाला देते हुए अमित शाह की सुरक्षा पर होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा था। जिसको गृह मंत्रालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि किसी की जान या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सूचना को सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

 

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