
Vasundhara के Delhi दौरे ने बचा ली Ashok Gehlot की कुर्सी, BJP के हाथ से फिसल गई बाजी!
अनुराग मिश्रा
नई दिल्ली। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री ( Former CM of Rajasthan Vasundhara raje ) पिछले एक हफ़्ते से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। अपने दिल्ली प्रवास के दौरान वसुंधरा ( Vasundhara raje ) ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ( Bharatiya Janata Party national president Jagat Prakash Nadda ), रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ( Defense Minister Rajnath Singh ) संगठन के महत्वपूर्ण नेता बीएल संतोष संघ के तमाम वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की। वसुंधरा और पार्टी के बड़े नेताओं के बीच हुई। मुलाक़ात के दौरान तमाम नेताओं और सूबे में चल रहे सियासी घटनाक्रम को लेकर बेहद गंभीर चर्चाएं हुई। वसुंधरा ने पार्टी के तमाम बड़े नेताओं से पार्टी के तमाम नेताओं के कामकाज के तरीक़ों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपना पक्ष रखा। एनडीए के घटक दलों के कुछ नेताओं द्वारा ख़ुद को लेकर दिए गए बयान पर नाराजग़ी जतायी।
सूत्रों की मानें तो वसुंधरा के रुख़ को देखते हुए राजस्थान को लेकर चल रहे उठापटक में पार्टी की रणनीति में तमाम बदलाव करने पड़े। वसुंधरा राजे के दिल्ïली पहुंचने के बाद राजस्थान बीजेपी के 18 भाजपा विधायकों को गुजरात भेजना पड़ा। बताया जा रहा है कि वसुंधरा ने विधायकों को गुजरात भेजने को लेकर भी आपत्ति जतायी थी। भाजपा के महत्वपूर्ण सूत्रों के मुताबिक़ पार्टी के कई नेता राजस्थान में चल रहे सियासी ड्रामे में से भाजपा को दूर रहने की वकालत कर रहे थे। कैलाश मेघवाल ने तो खुलकर इस बारे में बयान पर भी दिया था। कैलाश मेघवाल कि इस पूरे प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के संगठन मंत्री चंद्रशेखर से भी बात हुई थी मेघवाल ने अटल बिहारी वाजपेयी आडवाणी सहित तमाम पार्टी के पुराने नेताओं की आदर्श को रेखांकित किया था।
अशोक गहलोत के भैरव सिंह शेखावत की सरकार गिराने की साजिश में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और राज्यपाल के सामने विरोध किए जाने की बात आने के बाद राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, सहसंगठन मंत्री सतीश और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बीच बातचीत भी हुई थी। राजस्थान प्रदेश के तमाम नेताओं में भौरों सिंह शेखावत वाले बयान पर राजस्थान की संवेदनशील जनता का रुख भाजपा के खिलाफ़ हो जाने की भी आशंका जतायी थी। सबसे बड़ी बात यह है कि वसुंधरा ने केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और सचिन पायलट के इस बेमेल सियासी दोस्ती को लेकर पार्टी के और संघ के नेताओं से सवाल किए थे। वसुंधरा राजे ने राजनाथ सिंह और नड्डा को इशारों इशारों में इस बेमेल दोस्ती के परिणाम को लेकर भी सावधान किया था। इसके अलावा सचिन के साथ मिलकर सरकार बनाने पर मुख्यमंत्री के नाम को लेकर भी बीजेपी के नेता पीयूष गोयल पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान गजेंद्र सिंह शेखावत मंथन करते रहे लेकिन मुख्यमंत्री पद पर सचिन पायलट गाजेंद्र सिंह शेखावत वसुंधरा सहित एक दो और लोगों की भारी दावेदारी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के सामने चुनौती बनकर आयी।
अमित शाह के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से इस मामले में पहले जितनी सक्रिय भूमिका नहीं रही। भाजपा के एक वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक़ राजस्थान सरकार द्वारा तमाम लोगों की बातचीत टैप कराने को लेकर भी पार्टी के कई नेताओं में चिंता फ़ोन टैपिंग और संजीवनी मामले में गजेंद्र सिंह के नाम आने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने भाजपा नेताओं को जानकारी दी थी कि अगर। राज्य में तख्ता पलट होता है तो बोहोत से भाजपा के नेता भी लपेटे में आ सकते हैं।
इधर भाजपा के विधायकों में टूट की खुफिया जानकारी मिलते ही पायलट कैंप बैकफुट पर आया पायलट कैंप को लगा कि अगर बीजेपी में टूट हो जाती है और किसी तरह गहलोत अपनी सरकार बचा ले जाते हैं ऐसे में पायलट की विधायकी तो जाएगी उन पर अन्य तरीक़ों से भी शिकंजा कसा जा सकता है।
Updated on:
11 Aug 2020 12:43 am
Published on:
10 Aug 2020 10:03 pm
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