
नई दिल्ली। जस्टिस दीपक मिश्रा पर महाभियोग को लेकर कांग्रेस के भीतर बगावती सुर उठने लगे हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा के मुद्दे पर कांग्रेस ने बहुत सोच समझ कर फैसला किया है। महीने भर पहले ही पार्टी में जस्टिस मिश्रा के महाभियोग को लेकर बाते होने लगीं थीं पर इस पर अंतिम फैसला करने में कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत समय लगाया। अब भले ही जज लोया मामले के फैसले को आधार बनाकर कांग्रेस ने महाभियोग लाने का फैसला कर लिया है पर पार्टी इस मुद्दे पर दो फाड़ होती जा रही है।
कार्यसमिति में नहीं हुई चर्चा, राहुल के नेतृत्व के खिलाफ असंतोष
पार्टी के सूत्र बताते हैं कि राहुल के काम काज के तरीकों को लेकर पारी के भीतर कई सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि महाभियोग लाने जैसा कदम बहुत सोच विचार के बाद उठाना चाहिए था और इसके लिए पार्टी कार्यसमिति की बैठक में चर्चा होनी चाहिए थी। जिसकी जरुआत नहीं समझी गई। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि महाभियोग का फैसला सही है या गलत, यह महत्वपूर्ण नहीं है। समस्या यह है कि इतने बड़े फैसले से पहले पार्टी की सबसे बड़ी संस्था कांग्रेस कार्यसमिति में इसकी चर्चा तक नहीं हुई। सदस्यों का आरोप है कि अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी अब तक कांग्रेस कार्यसमिति का गठन तक नहीं कर पाए हैं।
कैंडल मार्च की तरह लिया गया जज पर महाभियोग लाने का फैसला
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कार्यसमिति का गठन न हो पाने की स्थिति में कम से कम एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हो सकती थीं। पर ऐसा कुछ करने की जरुरत नहीं समझी गई। कुछ नेताओं ने बंद कमरे में आपस में फैसला करके महाभियोग लाने की घोषणा कर दी। पार्टी के कुछ नेताओं का आरोप है कि इतने बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह फैसला लिया गया जैसे किसी कैंडल मार्च या किसी विरोध प्रदर्शन के लिए लिया जाता है।
पार्टी में पहले से थी दो राय
बताया जा रहा है कि महाभियोग के मुद्दे पर पार्टी पहले से दो गुटों में बटी हुई थीं। एक धड़ा महाभियोग का विरोध कर रहा था जबकि दूसरा महाभियोग के फैसले का समर्थन कर रहा था। जब मामला राहुल गाँधी के पास आया तो उन्होंने एक तबके की बात स्वीकार करते हुए महाभियोग पर अपनी मुहर लगा दी। एक तरफ जहाँ कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आज़ाद जैसे नेता महाभियोग लाने के पक्ष में थे, दूसरी तरफ वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल जैसे नेता महाभियोग को गैर जरुरी मानते हुए भाजपा के खिलाफ सड़क पर उतरने के पक्ष में थे।
Published on:
21 Apr 2018 12:11 pm
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