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इसरो के वैज्ञानिकों ने दूसरी बार सफलतापूर्वक बदली Chandrayaan-2 की कक्षा

ISRO Scientist योजना के मुताबिक आगे बढ़ा रहे हैं चंद्रयान-2 को 6 अगस्‍त तक जारी रहेगा पृथ्‍वी की कक्षा को बदलने का क्रम 20 अगस्‍त को चांद की कक्षा में पहुंचेगा चंद्रयान-2

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नई दिल्‍ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की योजना के मुताबिक चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक अपने मिशन की ओर आगे बढ़ रहा है। इस मिशन को आगे बढ़ाने के क्रम में इसरो के वैज्ञानिकों दूसरी बार चंद्रयान-2 को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे।

इसरो के वैज्ञानिकों के मुताबिक 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चंद्रयान-2 के ऑर्बिट को बदलने का सिलसिला जारी रहेगा।

चंद्रयान-2 का अब तक का सफर

22 जुलाई को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद इसरो ने पहली बार चंद्रयान-2 की कक्षा में 24 जुलाई की दोपहर 2.52 बजे सफलतापूर्वक बदलाव किया था। तब इसकी पेरिजी 230 किमी और एपोजी 45,163 किमी की गई थी।

इसरो ने चंद्रयान-2 की कक्षा में 25 और 26 जुलाई की रात 1.08 बजे दूसरी बार सफलतापूर्वक बदलाव किया। अब इसकी पेरिजी 251 किमी और एपोजी 54,829 किमी कर दी गई है।

बता दें कि 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान-2 को पेरिजी (पृथ्वी से कम दूरी) 170 किमी और एपोजी (पृथ्वी से ज्यादा दूरी) 45,475 किमी पर स्थापित किया था।

4 दिन पहले एमके3 रॉकेट से अलग हो गया था चंद्रयान-2

22 जुलाई को लॉन्च के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा जारी है। लॉन्चिंग के 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 170 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने लगा था।

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चांद की कक्षा में पहुंचने से पहले इन चरणों से गुजरेगा चंद्रयान-2

1. चंद्रयान-2 इसरो के मिशन के मुताबिक 22 जुलाई से लेकर 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।
2. 14 अगस्त से 20 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा।
3. चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में 20 अगस्त को पहुंचेगा। इसके बाद 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।

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4. 1 सितंबर को चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा।
5. वहां से 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।