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कर्नाटक चुनावः कांग्रेस के घोषणापत्र के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट अभी नहीं देगा दखल

कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो चुनाव के बाद वैधानिक उपाय कर सकते हैं और जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत शिकायत की जा सकती है।

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supreme court

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नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के लिए कांग्रेस की ओर से जारी किए घोषणापत्र के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब चुनाव होने में सिर्फ 48 घंटे बचे हैं और ऐसे में किसी भी तरह दखल नहीं दिया जा सकता है। हालांकि साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो चुनाव के बाद वैधानिक उपाय कर सकते हैं और जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत शिकायत की जा सकती है।

घोषणापत्र से थी यह आपत्ति

यह याचिका श्रीराम सेना के प्रमोद मुतालिक ने दायर की थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'संवैधानिक पीठ का फैसला है कि कोई भी दल या उम्मीदवार धर्म के आधार पर वोट नहीं मांग सकता। लेकिन यहां पर धर्म के आधार पर वोट मांग गया है। याचिका में कहा गया है कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर घोषणा पत्र जारी किया है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है।' याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि चुनाव आयोग को निर्देश जारी करने को कहे कि घोषणापत्र से उस हिस्से को हटाया जाए। इसके साथ ही कांग्रेस की मान्यता रद्द करने और सभी उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की भी मांग की गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने की यह टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा घोषणापत्र में धर्म के आधार पर नहीं बल्कि समुदाय में सामाजिक-आर्थिक स्तर पर कमजोर लोगों के लिए कहा गया है। आपको बता दें कि बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले किसी ऐसी याचिका को सुनवाई के लिए कैसे स्वीकार कर सकते हैं जिसमें उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर रोक की मांग की गई थी।

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