14 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश की सियासत में नई नहीं है होटल और रिजॉर्ट की राजनीति, जानिए कब और क्यों छुपाए गए विधायक

देश की सियासल में होटल और रिजॉर्ट की राननीति कोई नई नहीं है। समय-समय पर विधायकों को होटल और रिजॉर्ट मं छुपाया जाता रहा है।

2 min read
Google source verification

image

Shiwani Singh

May 19, 2018

karanataka

देश की सियासत में नई नहीं है होटल और रिजॉर्ट की राजनीति, जानिए कब और क्यों छुपाए गए विधायक

नई दिल्ली। कर्नाटक में सियासी राजनीति अपने चरम पर है। कांग्रसे और बीजेपी दोनों की तरफ से कर्नाटक पर अपना कब्जा जमाने की जंग चल रही है, लेकिन ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आज शाम तक कर्नाटक का सियासी नाटक खत्म हो जाएगा। येदियुरप्पा सरकार को आज शाम 4 बजे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट करना है। फ्लोर टेस्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि कर्नाटक किसका होगा।

जानिए आज कर्नाटक विधानसभा में क्या-क्या होगा

लेकिन इन सब के बीच होटल और रिजॉर्ट की राजनीति भी उभर कर सामने आई है। हालांकि ये होटल और रिजॉर्ट की राजनीति कोई नहीं राजनीति नहीं है। ताजा मामलों में बात करें तो कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस ने अपने-अपने विधायकों को बचाने के लिए होटल और रिजॉर्ट में रखा। इसके पीछे की वजह अपने विधायकों की हरकतों पर लगातार नजर रखना है। आपको बता दें कि देश की राजनीति में विधायकों को होटल और रिजॉर्ट में ठहराने की यह कोई नहीं कहानी नहीं है। इससे पहले भी कई बार राजनीतिक दलों को अपने विधायकों को बचाने के लिए इस तरह के तरीके अपनाने पड़े हैं। तो आइए जानते हैं होटल और रिजॉर्ट से जुड़े कई और ऐसे घटना क्रम के बारे में...

आंध्र प्रदेश की राजनीति

सबसे पहले बात करते हैं 1984 में आंध्र प्रदेश की राजनीति के बारे में। आंध्र प्रदेश की राजनीति में होटल और रिजॉर्ट का पहला वाक्या 1984 में सामने आया था। उस दौरान कर्नाटक में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया एनटी रामाराव को बहुमत साबित करने के लिए एक महीने का वक्त दिया गया था। उस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री आरके हेगड़े ने उन्हें विधायकों के साथ कर्नाटक के देवानाहैली रिजॉर्ट में रखा था।

फुटपाथ पर कब्जा कर सामान बेचने वालों के खिलाफ अब दिल्ली पुलिस भी दर्ज करा सकती है एफआईआर

महाराष्ट्र की राजनीति

आंध्र प्रदेश के बाद 2000 में होटल और रिजॉर्ट की राजनीति सामने आई। महाराष्ट्र में कांग्रेस के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को अपनी सरकार बचाने के लिए 40 विधायकों के साथ बेंगलुरु में शरण लेनी पड़ी थी।

कर्नाटक की राजनीति

कर्नाटक के मौजूदा हालात से इतर अगर थोड़ा पीछे जाए तो पाएंगे कि आज जो कर्नाटक के हालात है इससे ठीक पहले 2004 में भी यही स्थिति थी। उस दौरान हुए विधासभा चुनाव में भी किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। उस समय राज्य में सबसे ज्यादा बीजेपी,फिर कांग्रेस और जेडीएस को वोट मिले थे। उस वक्त भी सरकार बनाने में कुछ इस तरह की दिक्कते आ रही थी। इस दौरान जेडीएस ने अपने विधायकों को बचाने के लिए बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में छिपाकर रखा था।

वहीं, दो साल बाद फिर से कर्नाटक में कुछ ऐसे ही हालात बने। उस समय भी जेडीएस को अपने विधायकों को लेकर रिजॉर्ट जाना पड़ा था। इसके बाद मानो कर्नाटक में विधायकों का हर दो साल में होटल और रिजॉर्ट जाना होता रहा। 2008 में 110 सीटों के साथ बहुमत के करीब पहुंची भाजपा ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था। बीजेपी की सरकार ना बने इसके लिए कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को बेंगलुरू के रिजॉर्ट में कई दिनों तक रखा था।

गुजरात की राजनीति

गुजरात में होटल और रिजॉर्ट की राजनीति अगले साल ही देखने को मिली थी। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए बेंगलुरु के ईगलटन रिजॉर्ट में कई दिनों तक रखा था।