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यूपी की बड़ी खबरः बीजेपी के राज में बीआरडी मेडिकल में आक्सीजन सप्लाई में खेल, हर महीना पांच लाख से अधिक का बंदरबांट

  सपा ने लगाया आरोप, कहा इंसेफेलाइटिस के आंकड़ेे छुपाकर दवाइयों के नाम पर करोड़ों का हो रहा वारा-न्यारा

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BRD Medical College Tragedy

यूपी सरकार पर समाजवादी पार्टी ने बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन सप्लाई के ठेके में कमीशनखोरी का आरोप लगाया है। सपा का आरोप है कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में लिक्विड आक्सीजन सप्लाई का ठेका कंपनी को देकर पांच लाख से अधिक रुपये की कमीशनबाजी/घोटाला किया जा रहा है।
गोरखपुर सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव ने पत्रकारवार्ता कर यह बताया कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में लिक्विड आक्सीजन गैस की सप्लाई होती है। यह गैस राजस्थान की आईनाॅक्स कंपनी से खरीदकर मेडिकल काॅलेज को एक फर्म मेसर्स पुष्पा सेल्स मुहैया कराता था। इसके द्वारा बीआरडी मेडिकल काॅलेज में साढ़े सोेलह रुपये प्रति लीटर की रेट से आक्सीजन सप्लाई का करार हुआ था। बीते साल अगस्त में बकाया भुगतान न करने के खेल में पुष्पा सेल्स कंपनी ने आक्सीजन सप्लाई रोक दी थी। बाद में मेडिकल काॅलेज प्रशासन व अन्य जिम्मेदारों ने सीधे आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी आईनाक्स से ही करार कर लिया।
जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव ने आरोप लगाया कि जो आक्सीजन सीधे न खरीदने पर करीब साढे़ सोलह रुपये प्रति लीटर के हिसाब से सप्लाई किया जाता था वह जब सीधे कंपनी से खरीदी हो रही तो 19.39 रुपये में खरीदी जा रही। जबकि सीधे खरीद पर रेट और कम होने चाहिए। सपा जिलाध्यक्ष ने बताया कि हर महीने करीब एक लाख बीस हजार लीटर से लेकर डेढ़ लाख लीटर तक लिक्विड आक्सीजन की खपत बीआरडी में है। ऐसे में हर महीने पांच लाख रुपये की बंदरबांट बीजेपी सरकार द्वारा आक्सीजन खरीदी में की जा रही है। सपा ने मांग किया कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन सप्लाई में हो रहे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

सपा जिलाध्यक्ष ने बताया कि बीजेपी सरकार अपनी विफलता छुपाने में लगी हुई है। बीआरडी मेडिकल काॅलेज में इंसेफेलाइटिस से आने वाले मरीजों, भर्ती की संख्या, डिस्चार्ज मरीजों की संख्या और मौतों का आंकड़ा प्रतिदिन स्वास्थ्य महकमा के अतिरिक्त शासन व मीडिया को देने का प्राविधान सपा सरकार में था। लेकिन बीजेपी सरकार इंसेफेलाइटिस रोकथाम के लिए कोई कारगर इंतजाम नहीं कर सकी तो आंकड़ों को सेंसर कर दी है। अब बीआरडी मेडिकल काॅलेज से इंसेफेलाइटिस का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। यह इसलिए क्योंकि इंसेफेलाइटिस के इलाज में दवाइयों के नाम पर भारी घोटाला किया जा रहा है। आंकड़ों का खेल चुपके से खेलकर दवाइयों के नाम पर लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारेे किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार इंसेफेलाइटिस के नाम पर करोड़ों लूटने की साजिश की है। यही वजह है कि महंगी कीमत पर लिक्विड आक्सीजन गैस की आपूर्ति ली जा रही, आंकड़ों को छिपाकर दवाइयों व अन्य चिकित्सीय संसाधनों के नाम पर करोड़ों इधर-उधर किया जा रहा। उन्होंने मांग किया कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।


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