Parliament Monsoon Session : हंगामेदार होने के आसार, सरकार भी जवाब देने के लिए तैयार

  • Central Government को इस बार Coronavirus और Galwan Valley Violence के मुद्दे पर कांग्रेस सहिसत अन्य विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
  • Congress ने दोनों मामलों को गंभीरता से न लेने और पारदर्शिता न बरतने के आरोप लगाए हैं।

By: Dhirendra

Updated: 26 Aug 2020, 02:06 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी ( Coronavirus Pandemic ) और गलवान घाटी हिंसा और तनाव ( Galwan Valley Violence ) के मुद्दे पर संसद का मानसून सत्र ( Monsoon Session ) 14 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। इस बार मानसून सत्र काफी हंगामेदार हो सकता है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ( BJP ) को कोरोना वायरस महामारी, गलवान घाटी में भारत और चीन ( India-China Dispute ) के सैनिकों के बीच झड़प जैसे मुद्दों पर विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

मानसून सत्र में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन ( Lockdown ) के कारण पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था ( Economic Crisis ) को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। इस मामले में कांग्रेस ने सरकार ( Central Government ) पर गंभीरता और सभी को साथ न लेकर चलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस इस बात पर भी अउ़ी है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष की घटना की जानकारी देने के बारे में मोदी सरकार ने पारदर्शी तरीका नहीं अपनाया।

दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं ( BJP Leaders ) का कहना है कि चीन और महामारी के बारे में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का पहले ही जवाब दिया जा चुका है। वे केवल राजनीति के लिए इन मुद्दों का उपयोग कर रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारी के मुताबिक इस साल मार्च में हुए सत्र में 10 अध्यादेश पारित किए गए थे, जिन्हें विचार के लिए लाया जाएगा।

इस बार जिन अध्यादेशों मानसून सत्र की लाने की संभावना है उनमें महामारी रोग ( संशोधन ) अध्यादेश- 2020, वाणिज्य ( संवर्धन और सुविधा ) अध्यादेश 2020, किसान ( सशक्तीकरण और संरक्षण ) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 भी शामिल हैं। साथ ही सांसदों के वेतन से संबिधत अध्यादेश भी सदन के पटल पर लाए जा सकते हैं।

इसके अलावा डेटा प्रोटेक्शन बिल और लेबर कोड सहित अन्य विधायी मुद्दे भी हैं जिसे सत्ताधारी पार्टी की ओर से सत्र के दौरान विचार के लिए लाए जाने की संभावना है।

बता दें कि दिसंबर, 2019 में शीतकालीन सत्र में पेश किया गया डेटा प्रोटेक्शन बिल2019, डेटा संग्रहण और साझा करने के नियमों से संबंधित है जो कि नागरिकों के लिए उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर परिभाषित करता है। वर्तमान में एक संयुक्त संसदीय समिति द्वारा इसकी जांच की जा रही है।

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