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क्या क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने से कांग्रेस को होगा फायदा? समझे पूरा गणित

Impact of Weakening Regional Parties on Congress Party: तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी जैसे क्षेत्रीय दलों के कमजोर पड़ने के बाद देश की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।

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भारत

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Ashib Khan

Jun 23, 2026

Regional parties decline

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (बाएं) और राहुल गांधी (Photo-IANS)

Regional Parties vs Congress in Indian States: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में टूट गई है। विधानसभा से लेकर संसद तक पार्टी दो भागों में बंट गई है। इसके बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में शामिल हो गए है। वहीं आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद भी बीजेपी में शामिल हो गए है। AAP, शिवसेना यूबीटी और तृणमूल कांग्रेस के कमजोर होने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या देश की राजनीति में क्षेत्रीय पार्टी कमजोर हो रही है? यदि क्षेत्रीय पार्टी कमजोर हो रही है, तो कांग्रेस को इससे क्या लाभ होगा?

क्या क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने से कांग्रेस को होगा लाभ

देश की राजनीति में क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने से कांग्रेस को लाभ हो सकता है। दरअसल, अभी भी कई ऐसे राज्य है जिसमें मुख्य विपक्ष में क्षेत्रीय पार्टी है। जैसे- यूपी, बिहार और बंगाल है। यूपी और बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी की कांग्रेस भले ही सहयोगी है, लेकिन अभी भी पार्टी का उतना जनाधार नहीं है। इन राज्यों में कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टी के सहयोग का सहारा लेना पड़ता है। 

देश में वर्तमान में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ही है। लोकसभा और राज्य सभा में बीजेपी के बाद यदि किसी पार्टी के सबसे ज्यादा सांसद है, वह कांग्रेस के है। लोकभा में कांग्रेस के 98 तो वहीं राज्य सभा में 28 सांसद है।

यदि क्षेत्रीय पार्टी कमजोर होती है, तो कांग्रेस को विपक्षी राजनीति के पुनर्गठन के रूप में मिल सकता है। फिलहाल विपक्ष कई क्षेत्रीय दलों में बंटा हुआ है, जिसके कारण कांग्रेस को परेशानी भी हो रही है। 

यदि ये दल कमजोर पड़ते है तो वोटर कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो सकता है। इसके अलावा वोटों का ध्रुवीकरण भी बंद हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक क्षेत्रीय दलों के कमजोर होने से एंटी-बीजेपी वोटों का एकीकरण आसान हो सकता है, जो कांग्रेस के लिए लंबे समय से चुनौती रहा है। 

कई राज्यों में बना पाएगी जगह

कांग्रेस को कई राज्यों में क्षत्रीय दलों के सहयोग की आवश्यकता होती है। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और बंगाल जैसे राज्यों में (सपा, राजद, शिवसेना-एनसीपी, टीएमसी आदि) कांग्रेस की जगह घेरते रहे हैं। 

इन दलों के कमजोर होने से कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत कर सकती है। प्रदेश में मुख्य विपक्ष के रूप में उभर सकती है या फिर सरकार भी बना सकती है। दरअसल, इन जगहों पर क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को सीटों के बंटवारे में भी माथापच्ची करनी पड़ती है। जिससे कई सीटें कम भी हो जाती है। 

इसके अलावा इन दलों का प्रदेश में वर्चस्व भी ज्यादा है, जिससे सरकार बनने के बाद सीएम की कुर्सी भी देनी पड़ती है। ऐसे में यदि ये दल कमजोर होते है, तो कांग्रेस को फायदा होगा। 

एक फायदा विपक्षी गठबंधन की गतिशीलता में बदलाव का भी है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्षी दलों ने मिलकर एनडीए के खिलाफ इंडिया गठबंधन बनाया था। जिसका उद्देश्य केंद्र से मोदी सरकार को हटाना था। इस दल में कई क्षेत्रीय दल भी शामिल थे। लेकिन कुछ समय बाद ही यह गठबंधन लगभग टूट सा गया है। कई दल इससे अलग हो गए। यदि ये दल कमजोर होते हैं तो गठबंधन में भी कांग्रेस की ताकत बढ़ेगी। 

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