
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, हर्षवर्धन, रमेश पोखरियाल 'निशंक' उन 11 मंत्रियों में शामिल थे जिन्होंने शाम को कैबिनेट फेरबदल से पहले बुधवार को इस्तीफा दे दिया। ताजा अपडेट के मुताबिक इन मंत्रियों ने केवल एक फोन कॉल आने के बाद अपने इस्तीफे दे दिए। शीर्ष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दूसरे कार्यकाल में अपना पहला कैबिनेट फेरबदल करने से ठीक पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को 11 फोन कॉल करने पड़े। नड्डा ने 11 केंद्रीय मंत्रियों को फोन किया और उनसे इस्तीफा देने को कहा। इसके पीछे वजह ये बताई गई है कि कुछ नए चेहरों के साथ पीएम मोदी का नया मंत्रिमंडल गठित करने के लिए तालमेल बैठाना चाहते थे। इसको मूर्त देने के लिए नड्डा ने 11 मंत्रियों को फोन किया था।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, हर्षवर्धन, रमेश पोखरियाल 'निशंक', डीवी सदानंद गौड़ा, संतोष गंगवार, संजय धोत्रे, देबाश्री चौधरी, रतन लाल कटारिया, प्रताप चंद्र सारंगी और बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे मिलते ही स्वीकार कर लिए। इससे पहले सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने मंगलवार को कर्नाटक का राज्यपाल बनाए जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था।
इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर सभी के बदले प्रोफाइल
कुल मिलाकर छह कैबिनेट मंत्रियों, एक राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) और पांच राज्य मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने के बाद उनमें से कुछ ने प्रसाद के ट्विटर बायो के साथ पटना साहिब लोकसभा बिहार से संसद सदस्य और भाजपा कार्यकर्ता कहकर स्थिति में बदलाव को दर्शाने के लिए अपना सोशल मीडिया प्रोफाइल बदल दिया। जबकि जावड़ेकर के प्रोफाइल में संसद सदस्य लिखा था। राज्यसभा।
कानून और आईटी मंत्री प्रसाद का इस्तीफा माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर और सरकार के बीच नए आईटी नियमों के अनुपालन सहित विभिन्न मुद्दों पर विवाद के बीच आया है। प्रसाद और सूचना और प्रसारण मंत्री जावड़ेकर द्वारा फेसबुक और ट्विटर, ओटीटी खिलाड़ियों के साथ-साथ डिजिटल मीडिया जैसी सोशल मीडिया फर्मों के लिए व्यापक नियमों की घोषणा के बाद इस्तीफे आए हैं। वहीं कोविड-19 संकट से निपटने में विफलता को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना के बाद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन इस्तीफा दिया। वर्धन, खुद एक डॉक्टर, स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रभारी थे।
इसी तरह महाराष्ट्र में अकोला लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली धोत्रे को मई 2019 में शिक्षा, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और देबाश्री चौधरी ने सुबह अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के रायगंज निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुनी गईं थी। वहीं संतोष गंगवार ने मीडिया की ओर से यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने श्रम मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, गंगवार ने हां में जवाब दिया। उनका इस्तीफा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके बरेली निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति के बारे में शिकायत करने के हफ्तों बाद आया है।
मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं 36 नए चेहरे
बता दें कि नए मंत्रिमंडल में 36 नए चेहरों में से आठ वकील हैं, चार डॉक्टर हैं, दो पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और चार एमबीए डिग्री धारक हैं। विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों की एक कड़ी से पहले शासनिक स्तर पर सभी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को 15 कैबिनेट मंत्रियों के अलावा 28 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें नए चेहरे और वरिष्ठ नेता शामिल थे। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कोविड—19 प्रोटोकॉल के मुताबिक कैबिनेट में पदोन्नत किए गए सात मंत्रियों सहित 43 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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Updated on:
08 Jul 2021 11:48 pm
Published on:
08 Jul 2021 11:46 pm
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