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Political Crisis: कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बोले- फ्लोर टेस्ट पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष लेंगे

कमलनाथ सरकार सियासी संकट का सामना कर रही है कपिल सिब्बल ने बीजेपी पर साधा निशाना बीजेपी विधायकों की खरीद-फरोख्त में जुटी है

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश ( Madhya Praesh ) में कमलनाथ सरकार ( Kamalnath Government ) के भविष्य को लेकर राजनीति चरम पर है। इस बीच कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ( Kapil Sibbal ) ने कहा कि फ्लोर टेस्ट पर फैसला लेना विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ( Speaker NP Prajapati ) के अधिकार क्षेत्र में है। उन्हें ही इस बात का फैसला लेने दें। उन्होंने कहा कि एमपी में कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गंभीर सियासी संकट का सामना कर रही है।

कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में हरीश रावत सरकार ( Harish Rawat Government ) को सदन के पटल पर बहुमत साबित करने की अनुमति मिली थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 16 से अधिक विधायक बेंगलूरु में हैं। एमपी में विधायकों की खरीद-फरोख्त करने को लेकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) को जमकर लताड़ लगाई।

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कपिल सिब्बल ने मीडिया की ओर ये यह पूछे जाने पर की क्या कमलनाथ सरकार बचेगी? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह सदन के पटल पर साबित होगा। मुख्यमंत्री ही सही स्थिति बता पाएंगे। कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि सरकार अच्छी और स्वच्छ राजनीति में विश्वास करती है तो उसे चाहिए कि वह 10वीं अनुसूची में संशोधन करे।

उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस पार्टी व्हिप ( Party Whip ) के खिलाफ जाने वाले विधायकों को लंबे समय तक चुनाव लड़ने से वंचित किया जाना चाहिए। ऐसे विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के छह साल तक उन्हें किसी भी पद पर नहीं बने रहने देना चाहिए।

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बात दें कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ( Governor Lalji Tandon ) ने कांग्रेस सरकार को विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करने को कहा है। हालांकि, सोमवार को होने वाली विधानसभा की कार्यवाही की सूची में इसका जिक्र नहीं था। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को हंगामे की भेंट चढ़ गया। विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए स्थगित करना पड़ा है।

इससे पहले प्रदेश में जारी सियासी घमासान के बीच बजट सत्र सोमवार को राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ । लेकिन वे सिर्फ एक पैरा ही पढ़ सके और उन्होंने इसे सिर्फ लगभग डेढ़ मिनट में पूरा कर दिया। इसे राज्यपाल की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। राज्यपाल ने सभी सदस्यों को उनके दायित्व कर्तव्यों के निर्वहन की सलाह दी है।