
Population Control Act: Bill introduced in Rajya Sabha, may be discussed on August 6
नई दिल्ली। देश की बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए अब एक बार फिर से बहस तेज हो गई है और इसी कड़ी में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की कवायद भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के जनसंख्या नियंत्रण बिल पर चर्चा के बीच अब मोदी सरकार भी संसद के मानसून सत्र में पूरे देश के लिए जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने की तैयारी में है।
इसको लेकर भाजपा ने खास रणनीति भी बनाई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा अपने राज्यसभा सांसदों के जरिए संसद के मानसून सत्र में जनसंख्या नियंत्रण बिल को प्राइवेट मेंबर बिल (Pvt M ember bill) की तरह राज्यसभा में पेश कराएगी। इस बिल पर 6 अगस्त को चर्चा होगी।
जानकारी के अनुसार, भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पहले ही 2019 में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था। राकेश सिन्हा के अलावा दो दिन पहले ही भाजपा के तीन राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, हरनाथ सिंह यादव और अनिल अग्रवाल ने भी एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है।
बता दें कि संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू होने वाला है जो कि 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 19 बैठकें (कामकाज के दिन) होंगी। सत्र शुरू होने से पहले 18 जुलाई को सदन के फ्लोर लीडर की बैठक होगी, उसके बाद सदन की कार्यवाही चलाने के लिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी।
बिल में क्या-क्या है प्रावधान?
जनसंख्या नियंत्रण बिल, 2021 में कई तरह के प्रावधान हैं। जिनमें दो बच्चों की नीति सबसे अहम है। इस बिल में कहा गया है कि जिन माता-पिता को 2 से अधिक बच्चे पैदा होते हैं, उनसे सरकारी सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा एक बच्चे की नीति पर भी खास ध्यान दिया गया है। इस बिल में दो से अधिक बच्चे होने पर माता-पिता के निम्न अधिकार छीन लिए जाने के कुछ प्रवाधान इस प्रकार हैं..
- किसी भी प्रदेश की सरकार की ए से डी कैटगरी की नौकरी में अप्लाई नहीं कर सकते।
- मुफ्त भोजन, मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी जैसी सब्सिडी नहीं दी जानी चाहिए।
- बैंक या किसी भी अन्य वित्तीय संस्थाओं से लोन नहीं प्राप्त कर सकते।
- केंद्र सरकार की कैटगरी ए से डी तक में नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकते।
- निजी नौकरियों में भी ए से डी तक की कैटगरी में आवेदन नहीं कर सकते।
- इनसेंटिव, स्टाइपेंड या कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलना चाहिए।
- कोई संस्था, यूनियन या कॉपरेटिव सोसायटी नहीं बना सकते।
- वोट का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार और संगठन बनाने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।
- ऐसे लोग कोई राजनीतिक दल नहीं बना सकते या किसी पार्टी का पदाधिकारी नहीं बन सकते।
- लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।
- राज्यसभा, विधान परिषद् और इस तरह की अन्य संस्थाओं में निर्वाचित या मनोनित होने से रोका जाना चाहिए।
एक बच्चा होने पर मिलेंगी ये सुविधाएं
जनसंख्या नियंत्रण बिल में जहां दो से अधिक बच्चे होने पर कई अधिकार छीनने की सिफारिश की गई है, वहीं एक बच्चा की नीति को प्रोत्साहित करने के लिए कई सरकारी सुविधाओं को अलग से दिए जाने का प्रवाधान किए जाने की बात कही गई है।
यदि कोई माता-पिता एक बच्चे के बाद अपना ऑपरेशन करा लेता है और दूसरा बच्चा पैदा करने की बात नहीं कहता है तो ऑपरेशन कराने वाले पति या पत्नी को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही यदि लड़का हुआ तो 50 हजार रुपये और लड़की हुई तो एक लाख रुपये अलग से सहायता राशि दी जाएगी।
इतना ही नहीं, बच्चे को पढ़ाई के समय केंद्रीय विद्यालय में एडमिशन, मेडिकल-इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट जैसे व्यावसायिक कोर्स करने के दौरान प्रेवश में प्राथमिकता दी जाएगी और फीस भी माफ कि जाने का प्रावधान किया गया है।
उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण का ड्राफ्ट तैयार
संसद में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बहस होने पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसको लेकर सियासी जंग भी छिड़ गई है। राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने इस ड्राफ्ट को तैयार किया है। इसमें कई तरह के सुझाव दिए गए हैं। हालांकि, अभी यह पूरी तरह से अंतिम ड्राफ्ट नहीं है। क्योंकि सरकार ने राज्य की जनता से 19 जुलाई तक राय मांगी है।
इस ड्राफ्ट में कई प्रावधान किए गए हैं। इनमें दो से अधिक बच्चों के अभिभावकों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। स्थानीय निकाय और पंचायत का चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं। यह भी सूझाव दिया गया है कि राशन कार्ड में भी चार से अधिक सदस्यों के नाम नहीं लिखे जाएंगे। 21 साल से अधिक उम्र के युवक और 18 साल से अधिक उम्र की युवतियों पर एक्ट लागू होगा। कानून लागू होने के बाद यदि किसी महिला को दूसरी प्रेग्नेंसी में जुड़वा बच्चे होते हैं, तो वह कानून के दायरे में नहीं आएंगी। यदि किसी के 2 बच्चे नि:शक्त हैं तो उसे तीसरी संतान होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा कि वे इस कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे।
Updated on:
12 Jul 2021 05:21 pm
Published on:
12 Jul 2021 04:34 pm
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