
Rafale fighter jet reached directly Jodhpur from Paris
नई दिल्ली। रफाल सौदे को लेकर केंद्र सरकार की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इसे लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के समय एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस सौदे पर आपत्ति जताई थी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन रक्षामंत्री और फ्रांस के रक्षामंत्री के बीच सितंबर 2016 में हस्ताक्षर से करीब एक महीना पहले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विमानों की कीमत को लेकर आपत्ति जताई थी। इसे लेकर कैबिनेट को एक नोट भी लिखा था।
यह अधिकारी उस वक्त रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक (वायु) के तौर पर समझौता समिति में शामिल थे। उनकी प्रमुख आपत्तियों में से एक यह थी कि नए रफाल की कीमत पिछली बार की प्रस्तावित मानक कीमत से अधिक थी। खबरों में कहा गया है कि अधिकारी द्वारा आपत्ति दर्ज कराने के बाद सौदे को मंजूरी देने में देरी भी हुई थी। कहा जा रहा है कि सौदे को उस वक्त मंजूरी दी गई जब रक्षा मंत्रालय के एक दूसरे अधिकारी ने आपत्तियों को खारिज कर दिया
एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार की खबर में बताया गया है कि रक्षा मंत्रालय के अधिकारी द्वारा रफाल सौदे को लेकर दर्ज कराई गई आपत्ति फिलहाल सीएजी के पास है। सौदे पर आपत्ति जताने के बाद इसकी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि सीएजी रफाल सौदे से जुड़ी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश कर सकता है, जिसमें इस सौदे को लेकर दर्ज की गई आपत्ति से जुड़ी विस्तृत जानकारी हो सकती है।
कांग्रेस ने फिर घेरा
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने गुरुवार को ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की आवाज को दबा दिया था। सुरजेवाला ने लिखा कि अधिकारी इस बात पर सवाल खड़ा कर रहा था कि मोदी सरकार 300 फीसदी अधिक दाम पर रफाल खरीद रही है, जिससे सरकारी धन को हानि होगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जिन अधिकारी ने संयुक्त सचिव के फैसले को पलटा, उन्हें बाद में यूपीएससी का सदस्य बना दिया गया।
Published on:
28 Sept 2018 01:04 pm
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